गेट वे ऑफ इंडिया ( भारत का प्रवेशद्वार )

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मुंबई के दक्षिणी समुंद्री तट छोर में कोलाबा, अपोलो बंदर पर स्थित "गेट वे ऑफ इंडिया" मुंबई का सबसे प्रमुख पर्यटक स्थल है। इसके नाम का सरल हिंदी अनुवाद समुद्र के रास्ते से भारत में आनेवाले के लिए "भारत का प्रवेशद्वार" कहा जा सकता है । इसे भारत की भूमि पे कदम रखने वाले सबसे पहले ब्रिटिश राजा " राजा जॉर्ज ५ और उनकी रानी मैरी" के १९११ के भारत आगमन की याद में बनाया गया था !

इतिहास

२ दिसंबर १९११ को ब्रिटिश राजा " राजा जॉर्ज ५ और रानी मैरी"  का भारत में आगमन हुआ था ! स्मारक का निर्माण कार्य ३१ मार्च १९१३ में प्रारम्भ किया गया था जो ₹२१ लाख की लागत के साथ १९२४ में सम्पन्न हुआ ! ४ दिसंबर १९२४ को भारत के तत कालीन ब्रिटिश वाइस-रोय द्वारा परेड के साथ धूमधाम से इसका उद्घाटन किया गया था ! १५ मीटर के व्यास में फैला हुआ यह स्मारक २६ मीटर ऊँचा है ! स्मारक के मध्य में अंग्रेजी के उत्कीर्ण शब्द स्मारक की स्थापना का कारण व राजा जॉर्ज ५ और रानी मैरी कि प्रथम भारत आगमन कि तिथि भी बतलाती है !

कैसे पहुँचा जाये ?

यहाँ पहुँचना बहुत ही आसान है ! स्थानीय रेल द्वारा  सबसे पहले आपको चर्चगेट / सी.एस. टी. (छत्रपति शिवाजी टर्मिनस) पहुँचना है और उसके बाद स्टेशन के बाहर से आप नियमित रूप से चलने वाली सरकारी बस या टैक्सी/कैब द्वारा स्मारक तक पहुंच सकते है !

मुख्य आकर्षण

"गेट वे ऑफ इंडिया" के साथ साथ उसके बाएँ ओर स्थित "दी ताज महल पैलेस" भी पर्यटकों में काफी लोकप्रिय है ! ब्रिटिश शाशनकाल में समुद्र के रास्ते से भारत आने वाले आगंतुकों के लिए १९०३ में बनाया गया यह होटल स्थानीय भावनाओं और विदेशी अबधरणाओं के रचनात्मक मेल से बना हुआ वास्तुशिल्पीय अभ्यांत्रिकी का बेमिशाल नमूना हैं ! आज भी यह मुंबई के सबसे आलीशान व शानदार होटल में से एक माना जाता है !"

 स्मारक के आसपास और भी कई सीमा चिन्ह है जैसे की स्मारक के दाहिनी ओर आपको "स्वामी विवेकानंद जी" की प्रतिमा और स्मारक के ठीक सामने "छत्रपति शिवजी महाराज जी" की प्रतिमा देखने को मिलती है !

      स्मारक स्थल से ही नौका विहार सर्विस भी उपलब्ध है ! यह सर्विस दो प्रकार के है एक जो सिर्फ समुद्र रेखा सीमा तक कि सैर करा कर पर्यटकों को वापस ले आती है और दूसरी जो एलिफैंट टापू / घारापुरी टापू तक ले जाती है !  टापू पर स्थित एलीफैंटा की गुफा भी यहाँ आने वाले पर्यटकों में काफी प्रशिद्ध है ! एलीफैंटा की गुफा "यूनेस्को के विश्व विरासत स्थल" में से एक है ! स्थानीय भाषा मे इसे "घारापुरी की गुफा" व "शिव गुफा मंदिर" भी कहा जाता है ! बताया जाता है कि नौंवी शाताब्दी से लेकर तेरहवीं शताब्दी तक "सिल्हार वंश" के राजाओं द्वारा इसे निर्मित किया गया है !  पहाड़ के पत्थरों को काटकर गुफा के अंदर की दीवारों पर हिन्दू धर्म के अनेक देवी देवताओं की मूर्ति बनाई गई हैं और गुफा के मध्य में शिवलिंग मंदिर भी बनाया गया है ! भारत के प्राचीन शिल्पकारों की संरचना का अद्भुत मिशाल है यह गुफा !

      स्मारक स्थल से ही नौका विहार सर्विस भी उपलब्ध है ! यह सर्विस दो प्रकार के है एक जो सिर्फ समुद्र रेखा सीमा तक कि सैर करा कर पर्यटकों को वापस ले आती है और दूसरी जो एलिफैंट टापू / घारापुरी टापू तक ले जाती है !  टापू पर स्थित एलीफैंटा की गुफा भी यहाँ आने वाले पर्यटकों में काफी प्रशिद्ध है ! एलीफैंटा की गुफा "यूनेस्को के विश्व विरासत स्थल" में से एक है ! स्थानीय भाषा मे इसे "घारापुरी की गुफा" व "शिव गुफा मंदिर" भी कहा जाता है ! बताया जाता है कि नौंवी शाताब्दी से लेकर तेरहवीं शताब्दी तक "सिल्हार वंश" के राजाओं द्वारा इसे निर्मित किया गया है !  पहाड़ के पत्थरों को काटकर गुफा के अंदर की दीवारों पर हिन्दू धर्म के अनेक देवी देवताओं की मूर्ति बनाई गई हैं और गुफा के मध्य में शिवलिंग मंदिर भी बनाया गया है ! भारत के प्राचीन शिल्पकारों की संरचना का अद्भुत मिशाल है यह गुफा !

"दी ताज महल पैलेस" होटल

 "गेट वे ऑफ इंडिया" व "दी ताज महल पैलेस" तो पयर्टकों के लिए सालभर खुला होता है किंतु नौका विहार सर्विस को वर्षा ऋतु के समय उच्च ज्वार की असंकाओं के कारण बंद कर दिया जाता है जिस से एलीफैंटा टापू जाना भी असम्भ हो जाता है !

पर्यटकों के लिए "गेट वे ऑफ इंडिया" के आस पास के सीमा चिन्ह दर्शाता हुआ यह मानचित्र !

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