कोरोना भारत छोड़ो

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यूँ तो भूतकाल में भी अनेकों महामारियां आयी थी और इंसान अपनी आर्थिक क्षमता और तकनीकि दक्षता एवं भूतकाल के अनुभवानुरूप और वर्तमान - भविष्य के आवश्यकतानुरूप सारे आधुनिक अनुसन्धान कर रखें हैं ! परन्तु सदी में कभी कभार कोई ऐसी घटना घट जाती है जो एक महामारी बन आती है और जो इंसान को अचानक असहाय दिखने पर मजबूर कर देता है!मानो सारे तंत्र - मंत्र के साथ मानव को किसीने कैद कर दिया हो ! इन दिनों उसी प्रकार की एक महामारी अपना विनाशक रूप धारण किये पुरे मानव समुदाय पर प्रकोप का फन फैला रही है जिसका नाम है "कोरोना"! हाँ कोरोना जिसने पुरे मानव समुदाय को यह कह रही है कि अगर आपमें जरा भी मानवता है, करुणा है, तो घर में रहकर साबित कीजिये ! या फिर एक आदमी का घर से बाहर निकलने की गलती जनसमुदाय के लिए विनाशक हो सकता है ! इस कोरोना के बारे में पुरे विश्व ने दो बातों को सर्वसम्मति से माना है (१) कोरोना एक महामारी है जिसका कोई टिका या इलाज नहीं हैं! परन्तु कुछ सावधानियों व् चिकित्सकों से सहयोग से बचा जा सकता है (२) कोरोना को रोका जा सकता है और वो सिर्फ सोशल डिस्टन्सिंग अर्थात कोई भी व्यक्ति अपने घरों से बहार न निकले एवं नियमित अंतराल पर अपने हाथ को साबुन से साफ करते रहें! कोई भी व्यक्ति कोरोना संक्रमित व्यक्ति से न मिले!

अब सवाल ये है, कैसे समझे कि कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित है या नहीं? आदरणीय देशवाशियों, इसीलिए तो हमारी सरकार ने २१ दिनों तक सभी को अपने अपने घरों में रहने के लिए आग्रह किया है! ताकि कोरोना वायरस का संक्रमण चैन टूट जाये!
हम सब यह मानते हैं २१ दिनों तक अपने अपने घरों में रहना बिलकुल आसान नहीं हैं! परन्तु इन सारे बातों का बेहद सकारात्मक उत्तर हमारे देश की मिट्टी में है, हमारे इतिहास में दर्ज है! या फिर दुनियां के महान पुरुषों के पद चिन्हों पर है! कभी इंसान भौगोलिक अस्तित्व बचाने तो कभी मानवीय अस्तित्व बचाने हेतु अपना सर्वस्व या फिर सर्वश्रेष्ठ दिया है! और कभी भी एवं कुछ भी आसान नहीं रहा होगा!

क्या भगवान श्रीराम का जहाँ एक तरफ राज्याभिषेक होना तय था और अचानक १४ वर्षों का वनवास निश्चित हो गया था क्या उनके लिए आसान रहा होगा वो दिन? मेरे से आप सब ज्यादा जानते होंगे! परन्तु मानवीय मूल्यों और मानवीय अस्तित्वों को बचाने हेतु अपना सर्वस्व त्याग दिया! हमारे वीरपुरुषों, जिन्होंने अपना सर्वस्व त्याग कर देश आजाद कराया, क्या उनके लिए आसान था? नेल्शन मंडेला जो जीवन के २७ वर्ष कैदी बन कारागाह में रहे अपने देशवासियों के लिए, क्या उनके लिए आसान था? एक महिला अपने गर्भ में नौ महीने अपने बच्चा को रखती है, उनके लिए आसान होती है क्या?

इन सारे बातों में कुछ भी आसान नहीं था और ना ही आज घर में रहना भी आसान है! परन्तुं हर दौर में समयानुरूप जो सर्वश्रेष्ठ हो उसे अम्ल में लाया जाता है! बात आसान और मुश्किल का नहीं है! बात जब देशभक्ति का हो या मानवता की हो तो सारे मुश्किलें आसान दिखने लगती है! एक जूनून सवार हो जाता है! और वही जूनून जीत का मंत्र बन पुरे देश में हरेक नागरिक का मुखस्वर से गूंजने लगता है!
हममे से बहुतों ने अनेकों बार क्रिकेट खेल के दौरान देखे होंगें कि एक बल्लेबाज जो बहुत आक्रामक खेलने के प्रसिद्ध है परन्तु उसे कभी कभी अपने टीम के योजनानुरूप धीमा खेलना पड़ता है और ये उसका बड़प्पन बन जाता है!
आज कोरोना हम सबको यही करने बोल रहा है! आज हम कितने शारीरिक दुरुस्त हैं, कितने गरीब या आमिर हैं, नेता या अभिनेता या दुनियां के सबसे बड़े उद्योगपति ही क्यों न हो!

कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर आसानी से संक्रमण फ़ैल जाता है! इसीलिए संक्रमण को रोकने के लिए हर व्यक्ति का अपने अपने घर में रहना ही एक मात्र उपाय है! यही बात विश्व स्वस्थ्य संगठन (WHO - वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन) ने भी माना है और सभी देशों को भी अपना सन्देश दिया!
यहाँ पर एक बात का और भी ख्याल रखना हैं, जो की मानवता है! इस आपदा के घडी में हम सबको घर में रहते हुए मानवता को आगे लाना होगा! ये एक ऐसा वक्त है जब हम सब अपने घर में रहकर बिना किसी सीमा पर युद्ध किये विश्व युद्ध जित सकते हैं! दो महत्वपूर्ण काम करना हैं :-

(१) खुद को घर में रखकर स्वंय , परिवार एवं औरों में संक्रमण फैलने से रोक सकते हैं और अपने देश के संसाधन को पीड़ित व्यक्ति के लिए उपयोग होने दे सकते हैं !

(२) कोई भूखा न रहे इसके लिए अधिकतम सहायता चाहे दान देकर या दानाश्रम का पता पीड़ित व् जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुँचाकर भी कर सकते जो की हम फ़ोन के माध्यम से कर सकते हैं!
आपसे पुनः विनम्र निवेदन है हम सब अपनी जिम्मेदारी को समझे एवं पालन करे अपने आपको कोरोना से बचाने के लिए इस जान समुदाय को कोरोना से बचाने के लिए! कोरोना एक महामारी जरूर है परन्तु हमारी थोड़ी सावधानी, थोड़ा धैर्य ही कोरोना जैसे वायरस का खात्मा करने के लिए काफी है ! हाँ ये ध्यान रहे कि शत्रु छोटा हो या बड़ा, शत्रु के साथ छोटी सी लापरवाही अकल्पनीय घातक सिद्ध हो सकता है ! इसीलिए जब तक कोरोना का नामों निशान मिट न जाये हम सब घर में रहकर विश्व को एक बार फिर अपनी एकता का नया पैगाम दें !

इस संकट की घरी में देश के सारे नेता - अभिनेता, उद्योगपति, खिलाड़ी एवं सभी को आगे आएं और यथासंभव राहत कार्य हेतु सहायता करें ! जिस तरह देश के चिकित्सक एवं सहयोगी कर्मचारी, पुलिस, मीडियाकर्मी अपना सर्वश्रेष्ट दे रहें उसी तरह हम सब अपनी जिम्मेदारियों को समझे एवं उसका सही उपयोग करें !

रणजीत कुमार

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आओ हमसब कसम खाएं
२१ दिनों तक घरों से बाहर न आएं
कोरोना थककर जबतक टूट न जाये
हम उसको अपना मुँह न दिखाएँ
हम अपने वादे को किसी हाल में भूल न जाएँ
जब तक कोरोना भारत छोड़ न जाएँ!

रणजीत कुमार बेगूसराय बिहार

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