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कोरोना वायरस अपडेट आने वाले समय में और खतरनाक हो जायेगा कोरोना वायरस

दुनिया भर में कोरोना महामारी चल रही है। कोरोना वायरस में शुरुआत से लेकर अभी तक कई बदलाव देखे गए है। जिसकी वजह से कोरोना और भी खतरनाक होता जा रहा है। शोधकर्ताओं के अनुसार कोरोना वायरस में कई बदलाव होने की वजह से और भी खतरनाक होता जा रहा है। वैज्ञानिकों को कोरोना वायरस के हजारों म्यूटेशन मिले है। और यह भी बताया की ज्यादातर म्यूटेशन में छोटे मोटे बदलाव हुए है। कोरोना वायरस अपडेट आने वाले समय में और खतरनाक हो जायेगा कोरोना वायरस

क्या कहना हैं, वैज्ञानिको का-

वैज्ञानिकों ने D614G नाम का एक म्यूटेशन पाया है। D614G नामक म्यूटेशन की वजह से वायरस का इंसानो की सेल को संक्रमित करना बहुत ही आसान हो गया है। माना जा रहा है की इस म्यूटेशन की उत्पत्ति चीन में कोरोना वायरस की शुरूआती के बाद हुआ है। जब ये वायरस यूरोप में पंहुचा उसके बाद ये और सभी देशो में तेजी से फैला। और यह भी बताया जा रहा है की D614G म्यूटेशन जून के अंत तक दुनुया के लग भग सभी वायरस सैंपल में पाया जाने लगा।

वैज्ञानिकों का मानना है की वायरस के स्पाइक प्रोटीन में अमीनो एसिड बदलावों के कारण इंसानों की सेल को संक्रमित करने की क्षमता और अच्छी हुई है। वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययनों में इस म्यूटेशन के साथ वायरस और भी स्पाइक्स मिले है। ये स्पाइक्स इंसानों के सेल की सतह पर उपस्थित रिसेप्टर्स  से चिपक जाती है। जिसकी वजह से वायरस जेनेटिक मेटेरियल को अंदर तक पहुंचा देती है। जैसे ही सेल में पहुँचती है वैसे ही सेल कई कॉपी बना लेता है। इस प्रक्रिया के चलते कुछ गलती होने से म्यूटेशन बन जाता है।

कितना खतरा हैं, इसका-

वैज्ञानिकों ने इसकी ये पुष्टि नहीं की है की D614G से कितना खतरा हो सकता है। कुछ लैब स्टडी में पता चला की ये म्यूटेशन वायरस  असली वाले वायरस से अधिक तेजी से संक्रमण फैला रहा है। इस वजह से लोग ज्यादा से ज्यादा संक्रमित होते जा रहे है। इससे बिमारी और भी गंभीर हो रही है। म्यूटेशन से दोबारा संक्रमित होने का खतरा हो सकता है जो चिंता जनक है। 24 अगस्त को हॉन्ग कॉन्ग में दोबारा संक्रमण का केस दर्ज किया गया है। इस व्यक्ति की उम्र 30 साल है जिसको दोबारा संक्रमण हुआ। इससे साढ़े चार महीने पहले पहली बार संक्रमित हुआ था। फिर उसके बाद म्यूटेशन बने और वायरस के नए प्रकार सामने आये और जिसकी वजह से वह दोबारा संक्रमित हो गया।

सर्दियों में इसका असर-

बताया जा रहा है की सर्दी के मौसम में नहीं फ्लू वैक्सीन की जरुरत पड़ती है। ताकि फ्लू वायरस के जेनेटिक में हुए बदलावों के अनुसार उसका असर हो सके। अगर किसी देश ने कोरोना की वैक्सीन बना भी लेता है तो उसे समय समय पर वैक्सीन में भी बदलाव करने पड़ेंगे। वैसे तो म्यूटेशन रातो रत नहीं बनते। लेकिन कोरोना वायरस फ्लू वायरस से धीरे म्यूटेट कर रहा है। वैज्ञानिकों को ख़ास तौर पर वायरस में हो रहे बदलावों में नजर रखना होगा। क्या हमें वैज्ञानिकों के द्वारा भविष्य में और म्यूटेशन के बारे में सुनने को मिलेगा की नहीं ये तो वक्त बताएगा।

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