दिल्ली दंगे में दलित परिवार ने नाले में छुप कर बचायी अपनी जान

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pic credit Twitter
हाल ही में हुए दिल्ली दंगो में एक दलित परिवार ने मौत को अपने बहुत करीब से देखा । जी हाँ , एक दलित परिवार जो फरीदाबाद के सेक्टर 29 में रहता है , वो अपने बच्चे के इलाज के लिए दिल्ली गए हुए थे । उनको क्या पता था, कट्टरपंथी उनके जान के दुश्मन बन जाएंगे । 

 क्या है मामला ?

फरीदाबाद में रहने वाले मनीष गौतम अपने पिता हरे राम के साथ अपने छोटे बच्चे का इलाज कराने दिल्ली गए थे , हॉस्पिटल में बिजी होने के कारण उनको बाहर का कोई ज्ञान नहीं था । इलाज कराने के बाद जब वो बाहर निकलने लगे तबतक शाम हो चूका था ।कोई रिक्शा या ओला बुक नहीं कर पाने के कारण वो हॉस्पिटल में ही रुकने का निर्णय लिया ।

उनको यह लगा की वो हॉस्पिटल में सुरक्षित है, लेकिन रत 11:49 पे लगभग 100 लोगो का ग्रुप ने हॉस्पिटल पे हमला करदिया । 

बाहर से पत्थर और पेट्रोल बम आने लगे कुछ लोग हॉस्पिटल के गेट पे चढ़ने लगे । "अल्लाह हु अकबर" "अल्लाह हु अकबर" के नारे काफी तेजी से सुनाई देने लगा । बच्चा काफी डर गया और रोने लगा , मनीष समझ ही नहीं पा रहे थे क्या करे, फिर उन लोगो ने वहा से निकलने का ठाना, हॉस्पिटल के पीछे वाले गेट से निकलने के लिए भागे , तबतक एक पत्थर आकर हरे राम के पीठ पे आकर लगा । कैसे भी कर के वे वहा से बाहर निकले ।

चारो तरफ गाड़ियां जल रही थी

बाहर निकलते ही जो नजारा उन्हें दिखा वो बताते वक़्त भी मनीष कांप रहे थे , उन्होंने बताया चारो तरफ गाड़ियां जल रही थी लोगो पत्थर से कार में फंसे ब्यक्ति को मार रहे थे । 

डूबते को तिनका सहारा

उनको लगा आज उनका आखिरी दिन है , लेकिन डूबते को तिनका सहारा । मनीष के पिता को रोड से काफी दूर अंदर एक मोबाइल का फ़्लैश दिखा, उन्होंने मनीष को बोलै बेटा पूल के निचे अंदर कोई है । उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था । वो काफी तेजी से झाड़ियों से होते हुए पूल के निचे एक पत्थर पे जाकर बैठे। वहा पहले से ही २ लोग और थे , जो अपनी जान बचा कर वहा बैठे थे । रात के २ बजे वो सुरक्षित झाड़ियों में बैठने का फैसला किया , और सुबह होने तक का इंतजार किया ।

सुबह होने के बाद भी वो बाहर आने से डर रहे थे , मनीष ने बताया सुबह वो पुलिस के देखे जाने के बाद वो बाहर आए , पुलिस की जिप्सी उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाई। तब जाकर उन्होंने राहत की साँस ली ।

बौद्ध धर्म के अनुयायी है मनीष

मनीष ने हमसे बात करते हुए बताया की बौद्ध धर्म के अनुयायी है , वो बौद्ध और शांति में विश्वास करते है । लेकिन भीड़ हमे उस समय नहीं समझी और मेरे पिता जी को बुरी तरह चोट आई । उन्होंने बताया " मई वो रात अपने जीवन में कभी नहीं भूलूंगा, मई कभी इस्लाम या किसी दूसरे धर्म के बारे में गलत नहीं सोचा , लेकिन जो मेरे बेटे और मेरे पिताजी के साथ हुआ उसे काफी आहत हूँ , और उन लोगो को कभी माफ़ नहीं कर पाउँगा " 

हम लोग वो रात कभी नहीं भूल पाएंगे

उन्होंने ये भी माना जब लोगो के ऊपर खून सवार होता है वो कुछ समझने को तैयार नहीं होते । मैंने उन लोगो का कुछ नहीं बिगाड़ा था , और न ही वो कार में बैठा व्यक्ति जिसके कार में आग लगी थी और लोग उसे पत्थर मार रहे थे । मई काफी डरा हुआ हूँ और मेरा बच्चा भी , हम लोग वो रात कभी नहीं भूल पाएंगे ।

तो कुछ इस तरह - दिल्ली दंगे में दलित परिवार ने नाले में छुप कर बचायी अपनी जान । शुक्र है सब ठीक है , और जागरूक हिंदुस्तान इस घटना का कड़ी निंदा करता है । हम उम्मीद करते है आगे से हम कभी इस तरह खौफनाक न्यूज़ को पब्लिश करे ।

नाले में बैठकर अपनी जान बचाने की जरुरत पड़े तो हमें ये समझ जाना चाहिए , की हम कौनसा भविस्य अपने बच्चो के लिए बना रहे है । जो लोग आपस में लड़ के मार जाना चाहते है वो समाज के लिए कभी फायदेमंद नहीं हो सकते ।

3 COMMENTS

  1. जमीनें बाँटते फिरते हो, आसमान बाटों तो माने,
    अलग किये इंसान बड़े, परिंदे छाटों तो माने,
    जब पैदा हुआ था आदम तो क्या था
    हिन्दू या मुसलमान, मजहब बताओ तो माने.
    Nice article

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