फाईनल ईयर के एग्जाम को लेकर सुप्रीमकोर्ट में सुनवायी हुई पूरी

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फाइनल ईयर एग्जाम
Credit JagRuk Hindustan

आज सुप्रीमकोर्ट में फाईनल ईयर के एग्जाम होगे या नहीं होगे इसको लेकर आज सुनवायी थी। यूजीसी ने फाईनल ईयर एग्जाम को लेकर टर्म एंड कंडीशन जारी किया था। जिसको लेकर छात्रो में आक्रोश था। इसलिए यूजीसी के एग्जाम ना कराने के लिए छात्रो ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। जिसपर आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी की हैं।

विस्तार -

कोरोना के बढ़ते हुए मामले को देखते हुए छात्रो ने यूजीसी द्वारा फाईनल ईयर के एग्जाम कराने को लेकर जो गाइडलाइन जारी की थी। इसके खिलाफ छात्रो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना हैं, कि कोरोना के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रही हैं। और इसी बीच यूजीसी एग्जाम करा कर छात्रो का जीवन संकट में डाल रहा हैं। यूजीसी ने कहा था कि फाइनल ईयर के छात्रो के एग्जाम कराने जरूरी हैं। जबकि यूजीसी द्वारा बाकि सेमेस्टर और ईयर के बच्चो को बिना एग्जाम के ही पास कर दिया जाएगा।

क्या कहा आज यूजीसी ने कोर्ट में -

आज सुप्रीम कोर्ट में फाइनल ईयर के बच्चो के एग्जाम को लेकर सुनवायी थी। यूजीसी ने आज सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखते हुए कहा हैं, कि उन्होने विश्वविद्यालय को सूचित किया हैं कि सिंतबर में टर्म एंड कंडीशन पर परीक्षा के लिए उपस्थित ना होने वाले छात्रो के लिए संभव होने पर विशेष परीक्षा आयोजित करने की अनुमति माँगी हैं। यूजीसी ने कहा हैं, कि फाइनल ईयर के एग्जाम की अनुमति प्रदान करे।

क्योकि आयोग का मानना हैं, कि सीखना एक गतिशील प्रक्रिया हैं और साथ ही ये भी कहा कि परीक्षा ही किसी के ज्ञान को आंकने का एकमात्र तरीका हैं। यूजीसी ने कहा हैं था कि वह चाहता हैं, कि 30 सिंतबर तक  सारे विश्वविद्यालय फाइनल ईयर के एग्जाम करा ले। जिसके खिलाफ छात्रो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।  

क्या कहना हैं, छात्रो का -

यूजीसी द्वारा फाईनल ईयर के छात्रो का एग्जाम 30 सिंतबर तक कराने को लेकर छात्रो ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा हैं,कि देश में कोरोना के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। और इस समय परीक्षा  कराना छात्रो के जान को जोखिम में डालने जैसा होगा। क्योकि बहुत से छात्र ऐसे हैं, जो दूसरे शहरो से एग्जाम देने आते हैं। और कोरोना के चलते उनका दूसरे जगहों से आना कैसे सही हैं। और एग्जाम में भारी मात्रा में छात्र एकत्रित होते हैं। 

जिसकी वजह से संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ जायेगा। क्योकि बहुत से ऐसे लोग भी हैं, जिनमें कोविड-19 के लश्रण नहीं हैं। उसके बाद भी कोरोना पॉजीटिव हैं। वो दूसरे बच्चो में संक्रमण फैला सकते हैं। इसलिए छात्रो ने यूजीसी के द्वारा जारी की गयी गाइडलाइन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। और छात्रो का ये भी कहना हैं, कि पढ़ाई तो पूरी हुई नहीं हैं। फिर एग्जाम कैसे हो सकता हैं।

क्या कहा वकीलो ने –

सुप्रीम कोर्ट में वकील श्याम दीवान ने कहा हैं, कि कैसे कॉलेजो में एग्जाम कराया जा सकता हैं। खासकर उन कॉलेजो में जहाँ आज भी क्वारनटाइंन सेंटर बनाया गया हैं। छात्रो का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील एड. अलख आलोक श्रीवास्तव ने अनुच्छेद 14 का हवाला देते हुए कहा हैं, कि जो छात्र पहले ही बाहर हो चुके हैं। उनके साथ इस साल पास हुए छात्रो की तुलना अगल स्तर पर व्यवहार किया जायेगा। जो कि अनुच्छेद-14 का उल्लंघन हैं।

दिल्ली सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील केवी विश्वनाथ ने कहा कि वह सूचित करना चाहते हैं, कि मनीष सिसोदिया ने घोषणा की थी कि विश्वविद्यलयो को परीक्षा के लिए खुला छोड़ना सही नहीं होगा।

याचिका की सुनवाई के दौरान वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कई विश्वविद्यालय के पास तो ऑनलाइन परीक्षाओ को कराने के लिए आवश्यक आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं हैं. साथ ही भौतिक रूप से परीक्षाये कोविड-19 के कारण आयोजित नहीं की जा सकती हैं। उनका ये भी कहना हैं, कि महाराष्ट्र, पंजाब, पंश्चिम बंगाल, राजस्थान और ओडिशा जैसे राज्य कोविड के चलते परीक्षाये आयोजित नहीं कराना चाहते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा -

सुप्रीम कोर्ट ने कहा हैं, कि यूजीसी द्वारा अप्रैल और जुलाई में जारी की गयी गाइडलाइन्स में कोई भी बदलाव नहीं हुआ हैं। उस समय भी यूजीस ने एग्जाम को 30 सिंतबर तक कराने को कहा था। और आज भी यूजीसी फाइनल ईयर के एग्जाम 30 सिंतबर तक ही कराने को कह रही हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने सबकी सुनवाई पूरी कर ली हैं। तथा आदेश सुरक्षित रखते हुए कहा हैं, कि सभी पक्षो को 3 तीन की अवधि के भीतर अपनी लिखित याचिका दाखिल करनी होगी।

यूजीसी की तरफ से एससी मेहता ने कहा-

एससी मेहता ने सबकी बातो का तर्क निकाला तथा कहा कि विश्वविद्यालय परीक्षा की समय सीमा तय करने में देरी या स्थगित कर सकती हैं। लेकिन यह तर्क नहीं दे सकती कि बिना परीक्षा आयोजित किये डिग्री दे दी जाये। 

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा की जो विश्वविद्यालय परीक्षा करवा रही है उनको पहले से परीक्षाएं करवा चुके विश्वविद्यालयों के तरीको का अध्यन करके छात्रों के हित में ही फैसला करना चाहिए।

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