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GDP क्या है GDP of India 2020 क्यों चीन की जीडीपी भारत की जीडीपी से ज्यादा हैं

कुछ दिनों पहले आये जीडीपी के आंकड़े साल 1996 के बाद सबसे बड़ी जीडीपी गिरावट बताई जा रही है। साल 2020-21 के पहले तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच 23.9 तक़रीबन 24 फीसदी की गिरावट देखी गयी। कई विशेषज्ञो का यह भी मानना हैं, कि सरकार द्वारा जारी जीडीपी का यह आकड़ा सही नही हैं। उनके अनुसार 23.9 से ज्यादा भारत के आकड़ो में गिरावट हुई हैं। GDP क्या है भारत की GDP चीन से काम क्यों रही।  

GDP क्या है -

GDP Full Form (ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट ) सकल घरेलु उत्पाद कहते है। किसी देश की भौगोलिक सीमा के अंतर्गत किसी विशेष वर्ष के अंतर्गत बने वस्तुओ और सेवाओं का कुल योग होता है। भारत के भौगोलिक सीमा के अंतर्गत साल 2020-21 में जितनी भी वस्तुए और सेवाओं का उत्पादन होगा उन्ही के योग से जीडीपी को निर्धारित किया जाता है। भारत में यह काम सेंट्रल स्टेटिस्टिक ऑफिस (CSO) हर तीन महीने पर यानी साल में 4 बार करता है। इसके साथ ही सालाना जीडीपी के आंकड़े भी बताता है। इस साल की तिमाही में (भारत की जीडीपी) GDP of India 2020 का अनुमान लगाया गया था की यह गिरावट 18 फीसदी जाएगी लेकिन यह गिरावट उससे काफी आगे होकर 23.9 तक़रीबन 24 फीसदी की गिरावट हुयी।

जीडीपी गिरने के क्या कारण है-

भूगोल और अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञो का मानना  है। इन्होने बताया की जीडीपी गिरने के कई मुख्य कारण बताये है। उनके हिसाब से  पहला कारण कोरोना महामारी के पहले से ही भारत की जीडीपी सुस्त थी। जो साल के पहले तिमाही यानी जनवरी से मार्च के बीच जीडीपी ग्रोथ मात्र 3.1 फीसदी थी जो की यह भारत की अर्थव्यवस्था के अनुसार बहुत कम है। उनके हिसाब से  दूसरा कारण हाल में बढ़ती महगाई से बचने के लिए बैंको ने लोन की दरों को बढ़ा रखा था जिसका घरेलू  निवेश में नकारात्मक प्रभाव पड़ा जिसकी वजह से उत्पादन में कमी आयी।

जिससे उत्पादन का प्रभाव सबसे ज्यादा रोजगार पर पड़ा हैं। अगर लोगो के पास रोजगार नहीं होगा तो लोगो को वस्तु खरीदने की छमता कम हो जाती है। जो की सकल मांग में कमी के रूप में सामने आता है। तीसरा कारण 25 मार्च से लागु सम्पूर्ण लॉकडाउन लगने से सभी आर्थिक गतिविधियां बंद होने से वैश्विक स्तर पर भारी गिरावट देखी गयी। 

जीडीपी की गढ़ना कैसे की जाती है-

अब बात आती है की GDP क्या है और जीडीपी की गढ़ना कैसे की जाती है आइये जानते है। जीडीपी की गढ़ना के बारे में फैक्टर कॉस्ट में जीडीपी के लिए मुख्य रूप से 8 सेक्टर से आंकङे लिए जाते है जिनमे से पहला है कृषि जो की एक मात्र जीडीपी ग्रोथ में सकारात्मक आंकड़े देखने को मिले। दूसरा सेक्टर खनन और उत्खनन तीसरा विनिर्माण चौथा वानिकी और मत्स्यन पांचवा  इलेक्ट्रिसिटी, गैस और वाटर आपूर्ति छटा ट्रेड, होटल्स,कंस्ट्रक्शन, परिवहन और संचार सातवां फाइनेंसियल आठवां रियल स्टेट और बीमा सेक्टर, बिजनेस सेवाएं समुदायक सामाजिक और निजी सेवाएं यानी ये 8 सेक्टर मिलकर जीडीपी के आंकड़े निर्धारित करते है।यह सबसे महत्वपूर्ण बात है की जीडीपी में असंगठित सेक्टर को शामिल नहीं किया जाता है। जो देश के 90 फीसदी रोजगार का दायित्व दिखाता है। जो की अर्थशास्त्रो के अनुसार ये जीडीपी की गढ़ना में सबसे बड़ी कमी को दर्शाता है।

जीडीपी गढ़ना की विधि-

आइये जानते है की जीडीपी गढ़ना की वधि एक है या उससे अधिक  जीडीपी की गढ़ना मुख्य रूप से तीन प्रकार से की जा सकती है। पहला आय विधि के द्वारा, दूसरा धेय विधि के द्वारा और तीसरा उत्पादन विधि के द्वारा की जाती है। यह तीनो विधिया आपस में अन्तरसम्बन्धित होती है लेकिन फिर भी आर्थिक क्रियाओ के सन्दर्भ में उत्पादन की क्रिया प्राथमिक होती है जीडीपी की प्रक्रिया में उत्पादन विधि द्वारा जीडीपी की गढ़ना को मुख्यता दी जाती है।

क्या है माप दंड -

जीडीपी के तुलना किसी छात्र की मार्कशीट से की जा सकती है जिससे छात्र के बारे में पता चलता है की उसने साल में क्या प्रदर्शन किया है और वह किन विषयों में मजबूत रहा और किन विषयों में कमजोर रहा। वैसे ही जीडीपी के आर्थिक गतिविधियों के अस्तर को दिखाता है। किसी भी देश की जीडीपी गढ़ना सरल और सटीक नहीं हो सकती क्योंकि जीडीपी आंकड़ों की गढ़ना में कुछ त्रुटियां आने की संभावना होती है अतः इसे सरल और सटीक बनाने में तीन विधियों का प्रयोग किया जाता है।

GDP गड़ना के मुख्य बिंदु -

पहला जीडीपी का मार्किट प्राइस इसमें जीडीपी की गढ़ना बाजार मूल्य पर होती है। ये आंकड़े जीडीपी के वर्तमान स्थिति को दर्शाते है। इसमें आंकड़ों की महंगाई और इनडायरेक्ट टैक्स आदि का प्रभाव शामिल होता है। दूसरा जीडीपी या बेस प्राइस इसकी गढ़ना के लिए आधार वर्ष रखा जाता है जिससे आंकड़ों पर महंगाई या मंदी को हटाया जा सके और तीसरा जीडीपी एक्ट फैक्टर कास्ट इसकी गढ़ना बाजार मूल्य पर होती है। ये आंकड़े जीडीपी के वर्तमान आंकड़ों को प्रदर्शित करते है।

इसमें आंकड़ों में महंगाई या इनडायरेक्ट टैक्सेज आदि का प्रभाव शामिल होता है। दूसरा जीडीपी या बेस प्राइस इसकी गढ़ना के लिए एक आधार वर्ष रखा जाता है। जिससे आंकड़ों में महंगाई और मंदी को हटाया जा सके। और तीसरा जीडीपी एट फैक्टर कॉस्ट इस प्रकार की गढ़ना में प्राप्त आंकड़ों में टैक्स या सब्सिडी के प्रभाव को हटाया जा सके। जिससे वास्तविक रूप से जीडीपी की जानकारी हमें मिल सके।

चीन की जीडीपी क्यों रही पॉज़िटिव -

जीडीपी के घटने बढ़ने में हमारे और आपके खर्चे, प्राइवेट सेक्टर, सरकारी खर्च और आयत-निर्यात का बड़ा योगदान होता है। पुरे देश में जब कोरोना महामारी का प्रकोप रहा वहा पर चीन का जीडीपी सकारात्मक कैसे रहा जहा तक और सभी देशो की जीडीपी नकारात्मक रही। चीन की जीडीपी सकारात्मक इसलिए रही की चीन को अन्य देशो के मुकाबले सम्पूर्ण लॉकडाउन का सामना नहीं करना पड़ा सिर्फ चीन ने वुहान सिटी में ही सम्पूर्ण लॉकडाउन लगाया। यही कारण है की चीन की आर्थिक क्रियाये लगातार निरंतर चलती रही। और दूसरा कारण यह है की इस महामारी के कारण बड़े घरेलु बाजार का समर्थन प्राप्त हुआ।

चीन के बड़े  घरेलु बाजार में अर्थव्यवस्था में आवश्यक मांग बनाये रखी जिसकी वजह से उत्पादन में बहुत ज्यादा गिरावट नहीं हुई। वही पर अन्य देश सम्पूर्ण लॉकडाउन के चलते अपनी मुलभुत आवश्यकताएं पूरी न कर सके। वही पर अन्य देश अपनी घरेलु आवश्यकताएं पूरी करने के लिए चीन से आयत बढ़ा दिया जिससे चीन की अर्थव्यवस्था में न्यूनतम स्थिरता बनी रही। इसके साथ ही अंतर्राष्टीय मांग में उछाल आया जैसे- मैन्युफक्चरिंग, केमिकल, आईटी और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री यही कारण है की चीन की जीडीपी में सकारात्मकता देखने को मिली है।

GDP किसी देश की अर्थव्यवस्था का आइना -

जीडीपी किसी देश की अर्थव्यवस्था की हालत का संकेत देती है। इसे लोगो की आय से भी जोड़ कर देखा जाता है। इसका मतलब यह है की जितनी जीडीपी घाटी या बड़ी उतना ही प्रभाव आपकी आय पर होगा। इसमें असंगठित क्षेत्र का आंकड़ा शामिल नहीं है जिससे यह मालूम चलता है की उस क्षेत्र की हालत और भी ख़राब है। अब देखना होगा की सरकार क्या नीतियां लती है और रोजगार कैसे बढ़ाती है। और जितने भी मजदुर कोरोना के चलते घर वापस आये है उनको कैसे बुलाया जाये। और जिन आंकड़ों के ऊपर जीडीपी निर्भर है उन आठ सेक्टरों को कैसे नकारात्मक से सकारात्मक की ओर लाया जा सके। यह सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। 

यूनाइटेड किंगडम से भारत की जीडीपी की तुलना करना गलत हैं। क्योकि भारत एक विकासशील देश हैं और यूके एक विकसित देश हैं। तथा उसकी जीडीपी भारत से बहुत बड़ी हैं।

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