Hariyali Teej 2022: कल हैं हरियाली तीज पूजा के दौरान अवश्य पढ़े ये कथा नहीं तो मानी जाएगी आपकी पूजा अधूरी

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Hariyali Teej 2022/ Hariyali Teej 2022 Vrat Katha/ हरियाली तीज हर साल सावन की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को नागपंचमी के दो दिन पहले मनाया जाता हैं। इस दिन माता पार्वती व भगवान शिव की पूजा की जाती हैं। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं व व्रत रहती हैं। 

Hariyali Teej 2022 Date-

हरियाली तीज 2022 में 31 जुलाई को मनायी जाएगी। इस दिन स्त्रियाँ व्रत रहकर भगवान शंकर व माता पार्वती की पूजा करेगी। 

Hariyali Teej Subha Muhurat (हरियाली तीज शुभ मुहुर्त)-

तृतीया तिथि प्रारम्भ - जुलाई 31, 2022 को सुबह 02 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगा।
तृतीया तिथि समाप्त - अगस्त 01, 2022 को सुबह 04 बजकर 18 मिनट पर खत्म  होगा।

Hariyali Teej Vrath Katha (हरियाली तीज व्रत कथा)-

हरियाली तीज की कथा सुनाते हुए भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं कि हे पार्वती ! तुमने मुझे पति के रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठोर तप किया। अन्न और जल का भी त्याग कर दिया और सर्दी, गर्मी, बरसात जैसे मौसम की भी कोई फिक्र नहीं की. तब जाकर तुम्हें मैं प्राप्त हुआ हूँ। 

अब से पूजा के दौरान तुम्हारे इसी कठोर तप की कथा को ही पढ़ा जाएगा और सुना जाएगा. इससे अन्य महिलाओं को भी तुम्हारे तप के समान पुण्य की प्राप्ति होगी और उनकी कामना की पूर्ति होगी।

महादेव कथा सुनाते हुए कहते हैं कि हे पार्वती ! एक बार नारद मुनि तुम्हारे घर पधारे और उन्होंने तुम्हारे पिता से कहा कि मैं विष्णुजी के भेजने पर यहां आया हूं। भगवान विष्णु स्वयं आपकी तेजस्वी कन्या पार्वती से विवाह करना चाहते हैं। 

नारद मुनि की बात सुनकर पर्वतराज बेहद प्रसन्न हुए और उन्होंने शादी के इस प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार कर लिया। लेकिन जब तुम्हारे पिता ने ये बात तुम्हें बताई तो तुम बहुत दुखी हुईं क्योंकि तुम तो पहले ही मन से मुझे अपना पति मान चुकी थीं।

तब तुमने अपने मन की पीड़ा अपनी सहेली से कही. इसके बाद तुम्हारी सहेली ने तुम्हें जंगल में कठोर तप करने का सुझाव दिया। सखी की बात मानकर तुम मुझे पति के रूप में प्राप्त करने के लिए जंगल में चली गईं और वहां एक गुफा के अंदर रेत की शिवलिंग बनाकर तप करने लगीं।

तुम्हारे लुप्त होने से तुम्हारे पिता बहुत परेशान थे. वे हर जगह तुम्हें तलाश रहे थे। उन्हें इस बात की चिंता थी कि कही तुम न मिलीं और विष्णुजी बारात लेकर आए तो क्या होगा?

शिवजी माता पार्वती से आगे कहते हैं कि तुम्हारे पिता पर्वतराज ने तुम्हारी खोज में धरती और पाताल एक कर दिया, लेकिन तुम्हें ढूंढ नहीं पाए। तुम गुफा में सच्चे मन से तप करने में लगी रहीं। सावन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर प्रसन्न होकर मैंने तुम्हें दर्शन दिए और तुम्हारी मनोकामना को पूरा करने का वचन देते हुए तुम्हें पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया। 

इसके बाद तुम्हारे पिता भी ढूंढते हुए गुफा तक पहुंच गए। तुमने अपने पिता को सारी बात बताई और कहा कि मैं आपके साथ तभी चलूंगी, जब आप मेरा विवाह शिव के साथ करवाएंगे। तुम्हारी हठ के आगे पिता की एक न चली और उन्होंने ये विवाह करवाने के लिए हामी भर दी। शिव जी आगे कहते हैं कि श्रावण तीज के दिन तुम्हारी इच्छा पूरी हुई और तुम्हारे कठोर तप की वजह से ही हमारा विवाह संभव हो सका।

 इसलिए श्रावणी तीज का दिन महिलाओं की कामना पूर्ति वाला दिन बन गया। शिव जी ने कहा कि जो भी महिला श्रावणी तीज पर व्रत रखेगी, विधि विधान से पूजा करेगी, तुम्हारी इस कथा का पाठ सुनेगी या पढ़ेगी, उसके वैवाहिक जीवन के सारे संकट दूर होंगे और उसकी मनोकामना मैं जरूर पूरी करूंगा।

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