पाकिस्तान में हिंदुओ की हालत

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पाकिस्तान की करतूत किससे छुपी है, आये दिन वहाँ से कोई ना कोई ऐसी घटनाये सामने आती है, जो मानव जाति को शर्मसार कर देती है, हमने पहले भी कई बार सुना है कि वहाँ पर रह रहे हिन्दुओ और अन्य धर्म के लोगो के साथ उचित व्यवहार नहीँ किया जाता है तथा जिसे सुन रूह काप सी जाती है, जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते है। 

हालहि में पाकिस्तान की एक और शर्मनाक हरकत सामने आई है, हर दिन कोई ना कोई ऐसी खबर जरूर पाकिस्तान से आती है जो दिल दहला देती है, ये बात किसी से नहीँ छुपी है कि पाकिस्तान में किसी को भी धर्म के मामले में स्वतंत्रता नहीं प्राप्त है, वहाँ आये दिन कोई ना कोई ऐसा मामला सामने आता है जिससे पता चलता है कि वहाँ पर अन्य धर्म के लोगो पर अत्यचार किया जाता है।

खबरो की माने तो ऐसा ही एक ताजा मामला सामने आया है कि पाकिस्तान में कई ऐसे दलित परिवार है, जो वहाँ हो रहे उनके ऊपर अत्याचारो से इतना तंग आ चुके थे कि उन्होंने अपना धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया उन्हे लगा शायद ऐसा करने से उनके ऊपर हो रहे अत्याचार कम हो जाये लेकिन ऐसा नहीँ हुआ उनके ऊपर हो रहा अत्याचार कम नहीँ हुआ जबकि उनके ऊपर हो रहा  अत्याचार और बढ़ गया, अब वहाँ वो लोग जो दलित थे जिन्होने ईसाई धर्म अपनाया था, उनसे पाकिस्तान में नाले तथा सीवर साफ कराया जा रहा है और ना ही उनको सेफ्टी का समान दिया जा रहा है बिना मास्क और ग्लव्य दिये और बिना कपड़े पहने उन्हे गंदे नाले में उतरने के लिए मजबूर कर दिया जाता है तथा जिससे हालहि में पाकिस्तान में कई ईसाई सफाई कर्मियों की मौत की खबरे आई है।

एक न्यूज पोर्टल के हवाले से यह खबर आई है कि पाकिस्तान में एक ईसाई सफाई कर्मी जिसका नाम एरिक जमशेद है तथा जिसके पूर्वजो ने हिन्दु धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाया था उसके साथ भी यही घटना घटी रिपोर्टो की माने तो पिछले साल जुलाई के महीने में पाकिस्तानी सेना ने नालो की सफाई करने के लिए सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति करने से सम्बन्धित एक विज्ञापन छपवाया तथा उसमें केवल ईसाई धर्म से सम्बन्धित लोगो के नियुक्ति की बात कही गयी, लेकिन बाद में वहाँ की जनता द्वारा इसका विरोध करने पर यह विज्ञापन हटा दिया गया।

धर्म के आधार पर यह कुंठित विचारधारा मानवजाति को शर्मसार करती है।

पाकिस्तान के कई बड़े शहरो की नगर पालिकाओ में साफ-सफाई से सम्बन्धित सारे काम ईसाईयो से ही कराये जाते है, यहां तक की इन कर्मचारियों की जान की परवाह किये बिना उन्हे किसी सुरक्षा साधन के बिना ही गन्दे नालो में उतार दिया जाता है तथा उन्हे अपने हाथो से ही बिना ग्लप्स के ही गन्दा कचरा उठाना पड़ता है, इस कचरे में मल-मूत्र तथा शहर के नालो से आने वाला सारा कचड़ा शामिल होता है।

इतने बड़े शहरो में काफी सारा कचरा जमा होता है तथा नालो की  सफाई में काफी ज्यादा मेहनत लगती है और सुरक्षा के इन्तजाम ना होने पर जान जाने का भी जोखिम होता है तथा एक दिन तीन से अधिक नालो की सफाई करने के बाद भी इन्हे 500 रूपये तक भी नहीँ मिलते है।

इतने बड़े शहरो में काफी सारा कचरा जमा होता है तथा नालो की  सफाई में काफी ज्यादा मेहनत लगती है और सुरक्षा के इन्तजाम ना होने पर जान जाने का भी जोखिम होता है तथा एक दिन तीन से अधिक नालो की सफाई करने के बाद भी इन्हे 500 रूपये तक भी नहीँ मिलते है।

वँहा के एक समाजिक कार्यकर्ता ने जिनका नाम जेम्स गिल है उन्होने इन लोगो की बहाली के लिए और इनके ऊपर हो रहे अत्याचार को देखते हुए, पाकिस्तान की सरकार के सामने इनकी बाते रखी परन्तु ये सफाई कर्मचारी ज्यादा पढ़े लिखे ना होने के कारण अपने ऊपर हो रहे इस अत्याचार का विरोध भी नहीं कर पाते जिसकी वजह से इनकी आवाज वहाँ दबा दी जाती है।

  इन सफाई कर्मचारियो के आर्थिक हालात इतने खराब है कि थोड़े से रूपये के लालच में ही इन नालो में बिना किसी सुरक्षा के घंटो तक काम करने के लिए तैयार हो जाते है, पैसे की कमी तथा अपने परिवार का पेट भरने के लिए ये किसी भी प्रकार की तकलीफ झेलने को तैयार हो जाते है।

  इनमें से कई सफाई-कर्मचारियो का कहना है कि इनके पूर्वज हिन्दू थे परन्तु सामाजिक भेदभाव से बचने के लिए इन्होने ईसाई धर्म अपनाया लेकिन इसपर उन्हे इस प्रकार के भेदभाव का सामना करना पड़ता है। मजहब के आधार पर लोगो के साथ होने वाला यह बर्ताव लोगो की जिन्दगी को जहनुम बना देता है।

उनका कहना है कि पाकिस्तान में मुसलमान कर्मचरियों से कोई भी गन्दा काम नहीँ करवाया जाता है, उनसे सिर्फ वहाँ पर सड़को की मामूली साफ-सफाई करायी जाती है, जबकि ईसाई कर्मचारियों को इतना मजबूर कर दिया जाता है कि उनको अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए अपनी जिंदगी को जोखिम में डाल कर यह काम करना पड़ता है।

​गटर में काफी देर तक काम करने की वजह से उसमें से निकलने वाली मेथेन गैस की वजह से कभी-कभी उनकी जान भी चली जाती है और इसके वजह से इनको कई सारी बिमारियों का सामना भी करना पड़ता है और उनके बीमार होने पर उनके पास पैसे की कमी के कारण उचित इलाज मिलने में कठिनाई होती है जिसके वजह से उनको अपनी जान गवा देनी पड़ती है।

विश्व की कई बड़ी संस्थाओं तथा यूएन ने भी पाकिस्तान को उसके यहाँ रहने वाले अल्पसंख्यको की स्थिति सुधारने तथा उनके मानव अधिकार की रक्षा के क्षेत्र में कार्य करने को कहा है तथा वर्तमान स्थिति पर चिन्ता जताई है परन्तु वहाँ की सरकार इस तरह के किसी भी बात को मामने को तैयार नहीं होती तथा इन घटनाओ को नजरअंदाज करती है और अपनी गलती हमेशा छुपाती है।

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