कब तक खत्म होगा कोरोना वायरस का ये संकट?

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जहां पूरी दुनिया एक ऐसे युद्ध का सामना कर रही है, जिसमें दुश्मन का तो पता है लेकिन उस दुश्मन से कैसे बचा जा सकता है इस सवाल का उचित जबाव अभी भी दुनिया के किसी भी देश के पास नहीं है बस अपनी जान बचाना है, वास्तविक में ये दुश्मन कोई और नही कोरोना वायरस है।

लोगो के मन मे यही आशंका बनी हुई है कि कब और कैसे इस वायरस के संकट से बचा सकता है, दुनिया के हर कोने में इससे निपटने के लिए तरह-तरह के प्रयोग किये जा रहे है, वही ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जोन्सन नें ये विश्वास जताया है कि ब्रिटेन इस मुसीबत से 12 हफ्ते में ही निजात पा लेगा और इस कोरोना वायरस को जड़ से उखाड़ फेकेगा, इससे यही कहां जा सकता है कि भले ही कोरोना वायरस के मामले दुनिया में कम हो जाये लेकिन इतनी जल्दी उसको जड़ से उखाड़ कर फेकना आसान नहीं है, इसमें अभी भी कम से कम एक साल का समय लग सकता है।

कोरोना वायरस से बचने के लिए दुनिया में सिर्फ तीन रास्ते है।

  1. टीका
  2. लोगो में वायरस संक्रमण से बचने के लिए प्रतिरोधक क्षमता का अच्छा होना।
  3. लोगो का समाजिक व्यवहार।

​टीका-

लेकिन लोगो के मन में अभी भी ये सवाल बना हुआ है कि ये टीका कब तक आयेगा क्योकि एक टीका किसी भी व्यक्ति के शरीर को वो प्रतिरोधक क्षमता देता है, जो उसे बीमारियों से बचाता है तकरिबन 62 फीसदी जनता की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढाने को हर्ड इम्यूनिटी कहते है, ताकि कोई वायरस महामारी ना बन जाये। 

कोरोना पर एक से ज्यादा कई देशो में टीको पर शोध चल रहा है परन्तु यह अनुमान लगाना की यह कब तक समान्य रूप से प्रयोग में आ पायेगा, यह इन टीकाओ के सफल परिक्षण पर निर्भर करता है यदि यह परिक्षण सफल होते है तो अनुमान के आधार पर सामान्य रूप से लोगो के प्रयोग में आने में 12 से 18 महीनो का समय लग सकता है।

कोरोना के रोकथाम पर अन्य टीको का प्रयोग-

​बीसीजी का टीका- कई संस्थाओ का यह मानना है कि जिन देशो में BCG के टीको का उपयोग किया गया है उन देशो में कोरोना का संक्रमण कम हैं, परन्तु वैज्ञानिक रूप से अभी तक इस तथ्य की कोई पुष्टि नहीं है तथा WHO​, ICMR  समेत अनेक देशो की संस्थाए इस पर अध्ययन कर रही है, बीसीजी टीके का प्रयोग टी.बी. की रोकथाम के लिए किया जाता है। 

इसके साथ ही अन्य कई टीको का परिक्षण किया जा रहा है।

अन्य दवाईयाँ जो इसके रोकथाम के प्रयोग में लाई गयी है-

  1. Hydroxychloroquine जो दवा मलेरिया में प्रयोग की जाती है।
  2. एच.आई.बी की दवाईयो का प्रयोग भी किया जा रहा है तथा तात्कालिक रूप से इसके उचित परिणाम भी देखे गये है परन्तु इन पर शोध जारी है।

प्लाज्मा थेरेपी क्या है और इसका प्रयोग-

प्लाज्मा थेरेपी का भी प्रयोग इस रोग के रोकथाम में भी हो रहा है, भारतीय चिकित्सा संस्थान आईसीएमआर ने केरल सरकार के सुझाव के आधार पर इसका प्रयोग किया है, इस थेरेपी में उन मरीजो से जो कोरोना की बीमारी से सही हो चुके है रक्त लेकर उसमें उपस्थित प्रतिरोधक Antibodies को इससे ग्रसित मरीजो में प्लाज्मा द्वारा पहुचाया जा रहा है, जो मरीज कोरोना से सही हो चुके है उनका शरीर इससे लड़ने के लिए शरीर में Antibodies​ का निर्माण करता है जो कि रक्त के प्लाज्मा में उपस्थित होता है।

 चीन तथा अन्य देशो ने इसका सार्वजनिक रूप से प्रयोग शुरू कर दिया है,इसमे एक सही हुए मरीज से निकाले गये प्लाज्मा का प्रयोग 4 मरीजो के उपचार में किया जा सकता है।

 इस थेरेपी का प्रयोग असरदार होने के साथ-साथ सस्ता भी है, अनुमान लगाया जा रहा है कि इसके प्रयोग में प्रतिव्यक्ति 2500 तक का खर्च आ सकता है।

समाजिक व्यवहार –

Howard University के एक अध्ययन अनुसार कोरोना की रोकथाम के लिए सामान्य रूप से लोगो को एक से दो साल तक Social distancing तथा इसके अन्य नियमो का पालन करना होगा क्योकि कोरोना के रोकथाम में जिनता जरूरी टीके की खोज करना है उतना ही जरूरी इसके प्रति लोगो की सर्तकता भी है।

वर्तमान समय में कोरोना को रोकने का सबसे कार्यगर साधन लाकडाउन तथा इसके साथ-साथ बड़ी संख्या में लोगो की जाचं (Mass Testing) भी जरूरी है, इससे संक्रमित लोगो की पहचान कर उन्हे आईसोलेट किया जा सके, जिससे ये अन्य लोगो में ना फैले।

 ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक ने यह जानकारी दी है कि ब्रिटेन हर संभव कोशिश कर रहा है, वैक्सीन की खोज और इसके साथ ही उसके परीक्षण में ऑक्सफोर्ड और इम्पीरियल सबसे आगे है, हमारे ये दोनो प्रोजेक्ट बहुत तेजी से काम कर रहे है, वैज्ञानिको ने भी कहा है कि जितना हो सकेगा हम उतना मद्द करेगे तथा उन्होने इम्पीरियल प्रोजेक्ट के लिए 22.5 मिलियन पाउंड और इसके साथ ही ऑक्सफोर्ड टीम के लिए 20 मिलियन पाउंड देने कि घोषणा की जिससे वो क्लीनिकल ट्रायल कर सकते है, ऑक्सफोर्ड टीम की तरफ से तैयार की गई वेैक्सीन का 23/04/2020 से लोगो में ट्रायल किया जायेगा।

      "यह कहा जा सकता है कि अनुमाननित रूप से इसकी वैक्सीन 2021 तक पूर्ण रूप से उपलब्ध हो पायेगी।"

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