काशी विश्वनाथ मंदिर व ज्ञानवापी मस्जिद का क्या हैं सच

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काशी विश्वनाथ मंदिर व ज्ञानवापी मस्जिद का क्या हैं सच-
काशी विश्वनाथ मंदिर व ज्ञानवापी मस्जिद का क्या हैं सच

​काशी विश्वनाथ मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिगों में से एक हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तर-प्रदेश के वाराणसी शहर में गंगा नदी के तट पर स्थित हैं। यह माता पार्वती और भगवान शिव जी का पावन स्थान हैं।  पुराणों के अनुसार काशी विश्वनाथ में मृत्यु होने मात्र से ही मुक्ति मिल जाती हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर व ज्ञानवापी मस्जिद का क्या हैं, सच आइए जानते  हैं

हिन्दू धर्म ग्रन्थों के अनुसार भगवान विष्णु जी ने सृष्टि की रचना करने के लिए यहीं पर भगवान शिव जी की आराधना की थी। जिसके बाद ब्रह्मा जी भगवान विष्णु जी के नाभि से जन्म लिया। जैसे की आप सबको पता हैं, कि भगवान ब्रह्मा जी ने पूरे विश्व की रचना की थी।

लेकिन क्या आपको पता हैं। काशी विश्वनाथ का ये वास्तविक मंदिर नहीं हैं। बल्कि वास्तविक मंदिर स्थल के पास ही नया मंदिर का निर्माण हुआ था। और वास्तविक मंदिर की जगह ज्ञानवापी मस्जिद बनी हुई हैं।

क्या हैं पूरा मामला -

​भारत में ही नहीं विश्व में भगवान शिव जी के अन्नत भक्त देखने को मिलते हैं। और भगवान शिव जी के ज्योतिर्लिंगो के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु गण आते हैं। इन्ही 12 ज्योतिर्लिंगो में से एक हैं, गंगा नदी के किनारे स्थित काशी विश्वनाथ जी का मंदिर। बताया जाता हैं, कि भगवान शंकर जी के सबसे प्राचीन नामो में से एक नाम हैं विश्वनाथ। हिन्दु ग्रन्थों के अनुसार काशी विश्वनाथ मंदिर में स्वंय भगवान शंकर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे।

काशी विश्वनाथ मंदिर का नवीनिकरण 11 वीं शताब्दी में राजा हरिशचन्द्र जी ने करवाया था।

इतिहास कारो के अनुसार काशी विश्वनाथ जी के प्राचीन मंदिर को कई बार मुगलों द्वारा ध्वस्त कराया गया। और आखिर वो अपने मनसुबो में कामयाब हो गये। और उसकी जगह उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण करा दिया।

काशी विश्वनाथ मंदिर पर कितनी बार मुगलो ने किया आक्रमण -

किसने पहली बार किया था आक्रमण -

मुहम्मद गौरी एक ऐसा मुगल बादशाह था। जो भारत के प्रसिद्ध मंदिरो पर आक्रमण करके मंदिरो को लूटता था। बताया जाता हैं कि 1194 में इसने काशी विश्वनाथ मंदिर पर आक्रमण करके इसे तुड़वा दिया था।

दूसरी बार किसने किया था आक्रमण -

मुहम्मद गौरी के द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर तुड़वा देने के बाद हिन्दू राजा द्वारा उसका पुनः निर्माण कराया गया था। जिसके बाद 1447 में फिर एक बार जौनपुर के सुल्तान मोहम्मद शाह ने इस पर आक्रमण करके इसे तुड़वा दिया था।

तीसरी बार मंदिर पर आक्रमण -

​मोहम्मद शाह के द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर के तुड़वा दिये जाने के बाद हिन्दू राजा टोडरमल जी ने पुनः इस मंदिर का निर्माण कराया। उसके बाद काशी विश्वनाथ मंदिर पर शाहजहाँ ने आक्रमण  करने की कोशिश की लेकिन वो अपने इरादो में सफल नहीं हो पाया था।

किस मुगल ने काशी विश्वनाथ मंदिर तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण -

काशी विश्वनाथ मंदिर पर बहुत बार मुगलो द्वारा आक्रमण किया गया। लेकिन बाद में उसी स्थान पर दुबारा हिन्दु राजाओं द्वारा पुनः मंदिर का निर्माण करा दिया जाता था। लेकिन 1667 में मुगल बादशाह औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर को तुड़वा कर वहाँ पर ज्ञानवापी मस्जिद बनाने तथा वहाँ के हिन्दुओँ को मुस्लिम बनाने का आदेश दिया।

​इस बात का उल्लेख कोलकाता की एस्टिक लाइब्रेरी में रखे औरंगजेब के लिखे पत्र के द्वारा होता हैं। जो 1667 को लिखा गया था। उस पत्र में लिखा हैं कि औरंगजेब ने अपने सेनापति को काशी विश्वनाथ का मंदिर ध्वस्त कराने का आदेश दिया था।  

कैसे सिद्ध होता हैं कि औरंगजेब ने मंदिर के स्थान पर ज्ञानवापी मस्जिद बनवाया -

बताया जाता हैं, कि जब औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ के मंदिर को ध्वस्त करा कर उस जगह ज्ञानवापी मस्जिद बनाया। तब वहाँ के पुरोहितों ने शंकर भगवान के ज्योतिर्लिंग को मंदिर के ज्ञानवापी कुप मे छुपा दिया था।

​मंदिर को ध्वस्त कराकर उस जगह ही मस्जिद बनाया गया। इसका प्रमाण साक्षात वहाँ पर विराजमान नंदी जी बताते हैं। कि जहाँ आज ज्ञानवापी मंदिर हैं। वही पर काशी विश्वनाथ जी का मंदिर था। क्योकि वहाँ पर बने नंदी जी का मुख ज्ञानवापी मस्जिद के सम्मुख हैं। जबकि अन्य मंदिरों में देखा जाता हैं। कि नंदी का मुख भगवान शिव के सम्मुख होता हैं।

चीनी यात्री हेनस्वांग की काशी यात्रा के उल्लेख -

​चीनी यात्री हेनस्वांग जो कि 627-643 ईसापूर्व भारत आया था। उसने अपनी काशी यात्रा के उल्लेख में बताया हैं, कि काशी में एक विशालकाय शिवलिंग स्थापित हैं। जिसकी ऊचाँई 100 फीट होगी। उस समय काशी में काशी विश्वनाथ का ये मंदिर विराजमान था।

काशी विश्वनाथ मंदिर व ज्ञानवापी मस्जिद का क्या हैं सच-

12 ज्योतिर्लिंग Credit JagRuk Hindustan

​कविराज चदंवरधन कश्मीरी ने लिखा था औरंगजेब को पत्र -

औरंगजेब की इन कुकर्मो से आघात होकर कविराज चदंवरधन कश्मीरी जी ने औरंगजेब को एक पत्र लिखा जिसमें लिखा कि -

ऐं शहनशाह मेरे मंदिर का करिश्मा तो देख,

इसके गिरने बाद ही तेरे खुदा का घर बनता हैं।

इस पत्र को पढ़कर औरंगजेब बहुत लज्जित हुआ। और उसने दुबारा कभी काशी की तरफ आँख उठाकर भी नहीं देखा। लेकिन उसने अपने सैनिको को यह आदेश दिया कि दुबारा कभी भी उस स्थान पर काशी विश्वनाथ जी का मंदिर नहीं बनना चाहिए।

कब और किसने बनवाया नया मंदिर -

बताया जाता हैं कि काशी विश्वनाथ जी का मंदिर 108 वर्ष बाद अहिल्याबीई होल्कर जी ने दुबारा वही मस्जिद के पास में ही बनवाया। जहाँ पर वास्तविक मंदिर था। बताया जाता हैं कि इंदौर की रानी अहिल्याबाई होल्कर जी शंकर भगवान की परम भक्त थी।

 1853 में पंजाब के राजा रनजीत सिंह जी ने 22 टन सोने से मंदिर के शिखरों को सजवाया।

क्या हैं ज्ञानवापी मस्जिद केस -

पहले तो मुगलों ने काशी विश्वनाथ जी के मंदिर को ध्वस्त कराकर वहाँ ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण करा दिया था।

उसके बाद 11 अगस्त 1936 को मुहम्मद हुसौन और मुहम्मद जाकिर ने स्टेट ऑफ कॉन्सिल में एक्ट-62 के तहत यह कहकर केस दर्ज करा दिया। कि ये जमीन मस्जिद परिसर की हैं। जिसपर 1937 में तमाम ऐतिहसिक दावो और सबूतो के तहत इस मुकदमें को खारिज कर दिया गया। उसके बाद उन्होने हाईकोर्ट में एक्ट-466 के तहत इस पर याचिका दायर कि। इसपर पर भी बहुत दिनों तक केस चला फिर इसे भी खारिज कर दिया गया। तथा अभी इसपर सुप्रीम कोर्ट में याचिका जारी हैं।

बताया जाता हैं, कि 1810 को बनारस के तत्कालीन जिला न्यायधीश मि. वाटसन ने वाइस प्रेसीडेंट इन काउंसिल को एक पत्र लिखकर ज्ञानवापी मस्जिद का पूरा परिसर हिन्दुओं को सौपने की बात की थी। लेकिन ये कभी संभव नहीं हो पाया। आजतक इसपर विवाद जारी हैं।  

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