भारत की 10 सबसे डरावनी तथा रहस्यमयी जगहें

​हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं, जो कई तरह की अजीबो-गरीब रहस्यों से भरा हुआ है। भारत में भी ऐसी कई जगहें है। जिनका रहस्यमयी इतिहास लोगो के मन में उन्हें जानने की इच्छा को उत्पन्न करता है। परन्तु इनसें जुड़ी रहस्यमयी घटनायें लोगो के मन में इन स्थानों के लिए एक अजीब सा भय भी उत्पन्न करती है। भारत की 10 सबसे डरावनी तथा रहस्यमयी जगहों में ये जगहें शामिल है आइये इनके बारे में जानते हैं।

​1. भानगढ़ का किला -

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भारत की 10 सबसे डरावनी जगहे जिनमें सबसे पहले नाम भानगढ़ के किले का आता है। ये सिर्फ भारत की ही नहीं, एशिया की सबसे डरावनी जगहों में से एक हैं। भानगढ़ का किला राजस्थान के अलवर जिले में स्थित हैं। यहाँ पर सरकार के निर्देशानुसार शाम को 6 बजे के बाद किसी का भी जाना मना हैं। इसलिए यहाँ पर जो भी सैलानी घूमने जाते हैं।

उन्हें  5 बजे के बाद ही वहाँ से बाहर निकालना शुरू कर दिया जाता हैं। बताया जाता हैं, कि यहाँ पर कई पैरानॉर्मल इंवेस्टिगेटर्स ने अपने कैमरे में रिसर्च के दौरान कुछ अजीब तस्वीरें भी कैद की है। तथा उन्होंने कई पैरानॉर्मल एक्टविटिज को महसूस भी किया हैं। तथा यहाँ पर निगेटिव एनर्जी को भी महसूस किया है।

2. कुलधारा गाँव -

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भारत के डरावनी जगहों में कुलधारा गाँव दूसरे नम्बर पर आता हैं। कुलधारा गाँव जो की राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित हैं। लोगों की मानें तो यह एक शापित गाँव हैं। तथा यह गाँव 170 साल से विरान पड़ा हुआ हैं। यह गाँव पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा बनवाया गया था। बताया जाता हैं। कि शाम ढलते ही यहाँ पर रहस्यमयी परछाईयों को अक्सर देखा गया है। तथा यहाँ पर कुछ अवाजे भी सुनाई देती हैं। अब यहाँ पर सरकार ने पर्यटन स्थल बना दिया है। लेकिन यहाँ पर  भी शाम के समय जाना मना हैं। 

3. ​जमाली-कमाली मस्जिद -

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​भारत की 10 डरावनी जगहों में से जमाली-कमाली मस्जिद भी एक हैं। यह दिल्ली में स्थित हैं। ये कुतुबमीनार से 500 मीटर की दूरी पर ही स्थित हैं। बताया जाता हैं कि यहाँ पर दो कब्रे है। जमाली और कमाली की ऐसे तो यहाँ किसी को भी जाने का कोई शुल्क नहीं लगता हैं। लेकिन लोगो का मानना हैं कि ये कई सालों से विरान पड़ा था। जिसकी वजह से यहाँ जिन्नों ने अपना गढ़ बना लिया हैं। और हर रात यहाँ पर जिन्नों की महफिल लगती हैं। जिसकी वजह से यहाँ पर शाम को जाना मना हैं।

​4. रामोजी फिल्म सिटी -

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भारत की 10 सबसे डरावनी जगहे जिनमें से रामोजी फिल्म सिटी ​भी एक हैं। रामोजी फिल्म सिटी ये हैदराबाद में स्थित हैं। यह एशिया की सबसे बड़ी फिल्म सिटी हैं। इसे निजामों की युद्ध भूमि भी कहा जाता हैं। बताया जाता हैं कि यहाँ पर बहुत ज्यादा खून खराबा हुआ था। जिसकी वजह से यहाँ रात में हमेशा डरावनी आवाजे आती हैं। बताया जाता हैं की यहाँ पर अक्सर लोगों को डरावनी चीजों का एहसास होता हैं। यहाँ पर रात में घूमना मतलब मौत को दावत देने के समान हैं।

​5. मुकेश मिल्स -

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भारत की 10 सबसे डरावनी जगहों में मुकेश मिल्स का नाम भी आता हैं। यह मुम्बई में स्थित हैं। बताया जाता हैं कि भारत में हॉरर फिल्मों की शूटिंग के लिए मुकेश के मिल्स को सबसे अच्छा माना जाता हैं। यहाँ पर हमेशा जो लोग फिल्म की शूटिंग के लिए जाते हैं। उन्हें हमेशा डर का एहसास होता हैं। इससे जुड़ी घटनाओं के बारे में खुद कई फिल्म स्टार बताते हैं। बताया जाता हैं कि यहाँ कई लोग अचानक गायब हो गये थे। जिसकी वजह से यहाँ लोगो को जाने में और भी डर लगने लगा।

​6. शनिवारवाड़ा किला -

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 भारत के 10 डरावनी जगहों में से शनिवारवाड़ा किला का यह किला एक हैं। ये पुणे में स्थित हैं। ये पुणे शहर की सबसे डरावनी जगहों में से एक हैं। यहाँ आस-पास के लोगो का मानना हैं। कि यहाँ अक्सर रात के समय किसी राजकुमार के मद्द माँगने की आवाज आती हैं। तथा उसके रोने की आवाजे भी सुनाई देती हैं। लोगो का कहना हैं कि यहाँ रात के समय कोई बच्चा काका माला वाच्वा बोलता हैं। यहाँ भी लोग घूमने के लिए आते हैं। लेकिन शाम होते ही उन्हें वहाँ से बाहर निकलने को बोल दिया जाता हैं।

​7. जीपी ब्लॉक -

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ये भारत की 10 सबसे डरावनी जगहों में से एक हैं। जीपी ब्लॉक ये मेरठ में स्थित हैं। बताया जाता हैं कि यहाँ का बंगला सबसे डरावना हैं। लोग बताते हैं कि यहाँ एक अंग्रेज की आत्मा भटकती हैं। यहाँ पर कोई भी नहीं जाता हैं। पहले यहाँ पर कई लोग रहने आये लेकिन वो लोग यहाँ से चले गये हैं। लोगो का मानना हैं कि 24 घंटे उन्हें यहाँ किसी निगेटिव एनर्जी का एहसास होता हैं। अब यहाँ कोई भी नहीं आता जाता हैं।

8. ​डुमस बीच -

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गुजरात में स्थित डुमस बीच भी भारत के सबसे डरावनी जगहों  में से एक हैं। ज्यादातर लोग यहाँ जाना चाहते हैं। और इस बीच का आनन्द लेना चाहते हैं। लेकिन यहाँ के लोगो का मानना हैं कि शाम के समय यहाँ अक्सर चिखने-चिल्लाने की आवाजे आती हैं। जिसकी वजह से लोग यहाँ जाने से डरते हैं। सबसे खास बात तो यह हैं कि यहाँ की रेत सफेद ना होकर काली हैं।

​9. पिसावा का जंगल -

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भारत की 10 डरावनी जगहों में से एक हैं। उत्तर-प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित पिसावा का जगंल। बताया जाता हैं कि यहाँ पर प्रवेश करते ही सर-सर हवाओं की आवाजे आती हैं। तथा रात में काला पर्दा सा छा जाता हैं। यहाँ के जंगलों के बारे में बताया जाता हैं कि यहाँ के जंगलो से लकड़ीं ले जाना मना हैं। जो यहाँ के जंगलों से लकड़ी ले जाता हैं। उसका बुरा होता हैं। यहाँ पर सुबह के समय लोग मिल तो जायेगे। लेकिन ये लोग भी यहाँ के झाडियों मे नहीं जाते हैं। उनका मानना है कि जोे यहाँ कि झाड़ियों में जाता हैं। वो वापस नहीं आता हैं। उसके साथ कुछ ना कुछ बुरा हो जाता हैं।

10. डाउ हिल -

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कुर्शियांग पश्चिमी बंगाल में स्थित डाउ हिल भारत की डारावनी जगहों में से एक हैं। कुर्शियांग अपने बोडिंग स्कूलों और सैलानियों के घूमने के स्थान की वजह से जाना जाता हैं। बताया जाता हैं कि यहाँ के जंगलों में कई आत्महत्याऐ हुई हैं। जिसकी वजह से यहाँ हमेशा अजीबो-खरीब चीजों का देखा जाना भी बताया गया हैं। यहाँ पर दिसम्बर और मार्च की छुट्टियों में अक्सर आये पर्यटकों को किसी के पैरो के चलने की आवाजे आती हैं। यहाँ पर जानें वाले हर एक व्यक्ति का मानना हैं। कि ये काफी डरावनी जगह हैं। यहाँ पर एक व्यक्ति ने बताया था कि उसने एक कटे सिर वाले आदमी को भी देखा था। वहाँ के लोगो द्वारा बताई गयी ये बाते इस जगह को और भी डरावना बना देती हैं।

भारत में ऐसी बहुत सी जगहें जहाँ जाने से लोग डरते हैं। तथा जिसकों डरावना बताया जाता हैं। हमने आपको 10 सबसे डरावनी जगहों के बारे में बता दिया हैं। ऐसे ही कुछ और डरावनी जगहें  हैं। जैसें कि -

  1. बड़ोंग सुरंग नंबर-33, हिमाचल प्रदेश में हैं।
  2. अग्रसेन की बावड़ी, कनाट प्लेस, दिल्ली में है।
  3. थ्री किंग्स चर्च, गोवा के वेलसाओं में हैं।            

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अखिलेश यादव दे सकते है 2022 के चुनाव में योगी आदित्यनाथ को कड़ी टक्कर –

जहाँ पूरा देश कोरोना के कहर से परेशान है, वही उत्तर-प्रदेश जिसकी जनसंख्या 20 करोड़ से ज्यादा है और भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य भी है। जबकि यहाँ इतनी अधिक जनसंख्या होने के कारण भी यहाँ केवल कोविड-19 के मरीजों की संख्या 24056 और जिसमें से 16,629 डिस्चार्ज और 712 लोगो की मृत्यु हो चुकी है। आकड़ो की माने तो यहाँ कोविड-19 के मरीजो की संख्या बाकी राज्यो की तुलना में कम है। जिसकी वजह से यहाँ के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की तारीफ भी की गई है। अखिलेश यादव ​व योगी आदित्यनाथ में कड़ी टक्कर हो​ सकती है।

​लेकिन बताया जा रहा है कि 2022 का चुनाव जितना योगी आदित्यनाथ जी के लिए आसान नहीं होगा।

क्या है  पूरा मामला -

समाजवादी पार्टी और उत्तर-प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी ने 1 जुलाई 2020 को अपना 47 जन्मदिन मनाया। कोविड-19 के कारण इन्होंने अपना जन्मदिन काफी सादगी से मनाया है। और समाजवादी कार्यकरताओ ने भी समाजवादी दफ्तर में बड़ी ही सादगी से अखिलेश यादव जी का जन्मदिन मनाया हैं। और उन्होने अनाथ आश्रम में जाकर बच्चो को खाना भी वित्तरित किया हैं।

 हर साल उनका जन्मदिन बहुत-ही उल्लाष के साथ मानाया जाता है लेकिन इस साल काफी शान्ति से मनाया गया है। सूत्रो की माने तो उपचुनावो में मिली जीत की वजह से उन्होने 2017 में चुनाव हारने के बाद 2022 के चुनाव के लिए उन्होनें कमर कस ली हैं।

क्या हैं 2022 में अखिलेश यादव की तैयारी -

अखिलेश यादव जी के अपने 47 साल पूरा कर लेने और 2022 के चुनाव के पास होने की वजह से समाजवादी पार्टी के लोगो को उनसें उम्मीदे है, कि वह 2022 में उत्तर-प्रदेश में अपनी सरकार बनाने में सफल हो सकते है। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है, क्योंकि उत्तर-प्रदेश में हुये उपचुनावो में समाजवादी पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया है।​

​इन सबको देखते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव जी ने 2022 के चुनाव की तैयारिया तेज कर दी है। सूत्रो की माने तो अखिलेश यादव जी अब अपने पार्टी में जमीन से जुड़े लोगो और युवाओं को बढ़ावा देने का मन बना रहे है तथा इसके लिए वह खुद लोगो से मिल रहे हैं और उन लोगो को 2022 में चुनाव जितने की तरकीब बता रहे है तथा उन लोगो को ज्यादा से ज्यादा लोगो से जुड़ने की बात भी कह रहे है। ताकि 2022 के चुनाव में उनको सफलता मिल सके ।

क्या है उनकी तरकीब लोगो को जोड़ने की -​

2022 का चुनाव करीब है, जिसकी तैयारी हर एक पार्टी कर रही है, लेकिन समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर-प्रदेश युवा मुख्यमंत्री रहे  अखिलेश यादव ने नयी तरकीब अपनायी है। 2017 के चुनाव हार जाने की वजह से उन्होनें पहले ही बता दिया है कि वो इस बार किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं करेगे। वो अकेले ही 2022 का चुनाव लड़ेगे। सूत्रो की माने तो वह अपने पार्टी के लोगो से खुद मिल रहे है और उनको सुझाव दे रहे है कि कैसे 2022 में अपने  वोट बैंक को बढ़ाया जा सकता है, 2022 के चुनाव में वे सपा को एक मजबूत पार्टी बनाने कि कोशिश कर रहे है।

वो अपने कार्यकरताओं से मिलकर अपने बिखरे वोट बैंक को जमीन स्तर से जोड़ने की कोशिश करने को बोल रहे है जिसकी वजह से उनका जो वोट बैंक बिखर गया था उसको वापस पा सके इसके लिए उनकी पार्टी के द्वारा पलायन कर रहे मजदूरो के लिए खाने-पीने की व्यवस्था भी की गयी थी और उन लोगो के लिए कैंप भी लगाया था।

​उनका मानना है, अगर वोट बैंक सही रहेगे तो विरोधी पार्टियों में चुनाव का महोल भी बनेगा। इसके लिए अखिलेश यादव स्वंय और अपने पार्टी कार्यकरताओं को जनता में ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश करने को कह रहे ह। ताकि वो जनता की जरूरतो को समझ सके। जिसकी वजह से आने वाले 2022 के चुनाव में उनको इसका ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके।

​क्यो दे सकते है अखिलेश कड़ी टक्कर -

​सूत्रो की माने तो अखिलेश यादव की संरक्षण में समाजवादी पार्टी के हालहि में हुए, उपचुनावो में मिलने वाली जीत ने इनका काफी जोश बढ़ाया है। समाजवादी पार्टी को  रामपुर, जैद्यपुर, जलालपुर में मिली जीत से वो काफी प्रशंस हुए है । क्योकि इस चुनाव में पार्टी को कुल वोटो का 22 फीसदी वोट मिला है। जिसकी वजह से लोगो के मन में यह सवाल उठ रहा है। क्या अखिलेश यादव जी एक बार फिर से योगी आदित्यनाथ जी को 2022 के चुनाव में शिक्कस्त दे पायेगे।

​जिस तरह से उनकी तैयारियाँ  है, उसको देख कर तो यही आशंका जताई जा रही है। कि अखिलेश यादव जी इस बार योगी आदित्यनाथ जी के लिए एक कड़ी चुनौती के रूप में समाने आयेगें। अब इसका फैसला तो 2022 में ही होगा कि उत्तर-प्रदेश में इस बार किसकी सरकार बनती है।

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कुशीनगर एयरपोर्ट से जुडें जॉब की संभावनायें

उत्तर प्रदेश में स्थित कुशीनगर जिसका पहले नाम कसया बाजार था। कुशीनगर एक ऐतिहासिक स्थान है। अगर हम कुशीनगर के इतिहास की बात करे तो यहाँ का इतिहास बहुत ही समृद्ध और गौरवपूर्ण रहा है। कुशीनगर अर्न्तराष्ट्रीय एयरपोर्ट बन जाने पर लोग यहाँ के इतिहास को यहाँ आकर देख पायेगे। तथा देश-विदेश में कुशीनगर का इतिहास हमारी भारतीय सभ्यता को और लोकप्रिय करेगा।

​इतिहास की बहुत-सी घटनाये इस जगह से जुड़ी हुई है। लेकिन यह स्थान सबसे ज्यादा गौतम बुद्ध जो की बौद्ध धर्म के स्थापक थे। उनके महापरिनिर्वान की वजह से आज भी काफी लोकप्रिय है। यहाँ पर और भी बहुत से गौतम बुद्ध के मंदिर है। जिसकी वजह से ये एक अर्न्तराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है। दुनिया-भर से हर साल बड़े तादात में यहाँ बौद्ध धर्म से जुड़े अनुनायी आते है। गौतम बुद्ध के महापरिनिर्वान स्थान की वजह से बताया जाता है, कि यहाँ बौद्ध पूर्णिमा के दिन एक माह का मेला भी लगता है।

​इसी वजह से यहाँ काफी समय से इंडियन गर्वमेन्ट से कुशीनगर एयरपोर्ट को अर्न्तराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा देने की माँग की जा रही है।

​कुशीनगर एयरपोर्ट कब चालू होगा -

​उत्तर-प्रदेश के कुशीनगर जिले में गौतम बुद्ध के महापरि​निर्वान स्थान होने की वजह से यहाँ पर दुनिया-भर से बौद्ध अनुनायी भ्रमण करने आते है। और यहाँ अर्न्तराष्ट्रीय एयरपोर्ट ना होने की वजह से उन्हें काफी दिक्कतो का सामना करना  पड़ता है। जिसकी वजह से कुशीनगर एयरपोर्ट को अन्तराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा देने की माँग लम्बे समय से हो रही है।

आखिरकार 24 जून दिन बुधवार को केन्द्र सरकार ने इसे अर्न्तराष्ट्रीय एयरपोर्ट की मजूंरी दे दी। जिसकी जानकारी उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगीआदित्य नाथ जी ने ट्वीट करके दिया। और इसके लिए उन्होने केन्द्रसरकार का आभार भी प्रकट किया।

कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट ओपनिंग डेट -

​उत्तर-प्रदेश के मुख्यमंत्री योगीआदित्य नाथ जी ने बताया है, कि कुशीनगर एयरपोर्ट के लिए उन्होंने 2019 में ही एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के साथ एक एमओयू भी साईन कर चुके है। इसके लिए उन्होने 590 एकड़ जमीन भी पहले से ही खरीद ली है। बताया जा रहा है कि कुशीनगर एयरपोर्ट को बनाने में 190 करोड़ से भी ज्यादा का खर्चा आ सकता है।

बताया जा रहा है, कि कुशीनगर एयरपोर्ट के लिए 12 गांवो के लोगो ने अपनी जमीने दी है। तथा वहाँ के वे किसान जिन्होने अपनी जमीने दी है। उनको 185.25 करोड़ रूपये तक मुआवजे के तौर पर दिये जा चुके हैं। लेकिन अभी भी 6 गाँवो के किसानो का मुआवजा देना बाकी है। 2012 से ही इसका निर्माण कार्य शुरू था। लेकिन इसे अर्न्तराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा नहीं मिला था। और विधानसभा का चुनाव आने की वजह से कार्य बीच में ही रोक दिया गया था।

लेकिन योगी सरकार ने कुशीनगर एयरपोर्ट को अर्न्तराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा दिलाकर काफी सराहनीय  कार्य किया है। ​बारिश की वजह से इसके निर्माण कार्य में देरी हो सकती है।

कुशीनगर एयरपोर्ट पर कौन-कौन से कार्य हो चुके है -

कुशीनगर एयरपोर्ट पर काम 2012 से ही कार्यरत था। लेकिन चुनाव आने की वजह से पिछली सरकार ने काम रोक दिया था। फिर योगी सरकार ने कुशीनगर एयरपोर्ट का बाकी काम कराया। अभी तक कुशीनगर एयरपोर्ट पर 3200 मीटर लम्बी और 45 मीटर चौड़ी रनवे सड़क का निर्माण कराया जा चुका है। यहाँ पर अप्रन, शोल्डर, अप्रोच रोड़ और भी रनवे से जुड़े कार्य हो चुके है।

लेकिन बताया जा रहा है कि लगभग 23-24 मीटर अभी भी बाउंड्रीवार कार्य पूर्ण नहीं हुआ है। और कुशीनगर एयरपोर्ट से जुड़े गाँवो की पत्रवाली कार्य अभी भी अधूरा है। ऐसे ही बहुत से कार्य अभी भी अधूरे है। जैसे- एयर ट्रैफिक कंट्रोल व कंट्रोल रूम, पुलिस सब स्टेशन, गार्ड रूम और भी बहुत से कार्य अभी पूर्ण नहीं है, इनपर कार्य चल रहा है।

​कुशीनगर एयरपोर्ट पर लाइंटिक इंस्टालेशन और केबिलंग का कार्य भी पूर्ण नहीं हुआ है।

कब तक शुरू होगीं उड़ाने -

​कुशीनगर एयरपोर्ट से जुड़े कार्य को लेकर वहाँ के एसडीएम कसया देश दीपक सिंह ने बताया कि कोविड-19 की वजह से कार्य में देरी हो रही है। और बारिश की वजह से भी अभी तक कार्य रोक दिया गया है। कुशीनगर एयरपोर्ट से कुशीनगर तक की सड़क के कार्य के लिए आवश्यक बजट सरकार के द्वारा दे दिया गया है।

​उन्होंने बताया की किसानो का बकाया हुआ पैसा भी जल्द ही दे दिया जायेगा। तथा कुशीनगर एयरपोर्ट पर कार्य जल्द ही पूरा हो सकेगा और नवम्बर तक यह कार्य पूर्ण हो सकता है।

कुशीनगर में अर्न्तराष्ट्रीय एयरपोर्ट बन जाने से रोजगार में वृद्धि  -

 योगी सरकार ने कहा है कि कुशीनगर एयरपोर्ट को अर्न्तराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा मिल जाने की वजह से यहाँ पर दुनिया-भर से बौद्ध-धर्म से जुड़े पर्यटक यहाँ भ्रमण करने आयेगे। जिसकी वजह से यह एक काफी विकसित पर्यटक स्थल बन जायेगा। और यहाँ आस-पास के गाँव से जुड़े लोगो को रोजगार भी मिलेगा। उनके रोजगार में वृद्धि भी होगी।

उत्तर-प्रदेश में गौतम बुद्ध से जुड़े 6 धार्मिक स्थान है। जो कुशीनगर के 200 किलोमीटर के अन्तर्गत ही आते है। जैसे- लुम्बनि गौतम बुद्ध का जन्म स्थान, कपिलवस्तु, सारनाथ जहाँ बुद्ध भगवान को ज्ञान प्राप्त हुआ। बोधगया भी वहाँ से ज्यादा दूर नहीं है। इसी बात से आप अनुमान लगा सकते है। कि वहाँ पर रहने वाले लोगो के लिए योगी सरकार ने रोजगार की कितनी बड़ी सौगात दी है।

अभी तक उत्तर-प्रदेश में तीन अर्न्तराष्ट्रीय एयरपोर्ट लखनऊ, वाराणासी औऱ नोएडा ही थे। लेकिन कुशीनगर एयरपोर्ट बन जाने की वजह से चार अर्न्तराष्ट्रीय एयरपोर्ट हो जायेगे।

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बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर व एक्टर्स जिनकी मृत्यु आज भी एक रहस्य बनकर रह गयी है।

बॉलीवुड नाम ही काफी है, भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को बॉलीवुड कहा जाता है। बॉलीवुड ये शब्द पूरे भारतीय सिनेमा के लिए उपयोग नहीं किया जाता है, ये केवल मुम्बई की फिल्म इंडस्ट्री को ही कहा जाता है।

बॉलीवुड को लोग सपनो की दुनिया भी कहते है, लेकिन ये दुनिया दिखने में जितनी हसीन लगती है। क्या वास्तव में वो इतनी हसीन है, क्योकि हालही में बॉलीवुड के जाने माने एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की रहस्मयी तरीके से हुई मौत ने ये सोचने पर मजबूर कर दिया है,उनके कुछ करीबियो का मानना है कि वह पिछले 6 महीने से ड्रिप्रेशन का शिकार थे ।

 "आँसुओं की बूदों से अतीत की धुधँली यादे हवा में घुल रही है, कभी ना खत्म होने वाले सपने चेहरे पर एक मुस्कान लाते है तथा क्षण भंगूर जिंदगी इन दोनो के बीच में फसी हुई है।    माँ"

लेकिन ये पहली बार नहीं हुआ है, कि बॉलीवुड के किसी एक्टर या एक्टरेस की मौत रहस्मयी तरीके से हुई है। चलिए हम आज आपको बताते है बॉलीवुड के ऐसे कितने एक्टर या एक्टर्स है, जिसकी मौत रहस्यमयी तरीके से हुई है।

​1. दिव्या-भारती -

दिव्या-भारती जिन्होने इतने ही कम समय में अपनी सुन्दरता और एक्टिंग का लोहा मनवा लिया था। अगर उन्हे 90 के दशक की सबसे सुन्दर अभिनेत्री कहा जाये तो ये गलत नहीं होगा। इन्होने बहुत ही कम समय में बहुत सोहरत हासिल कर लिया था। ये इतने ही कम समय में 15 से अधिक फिल्मों में काम कर चुकी थी। इनकी शादी साजिद नाडियावाला से हुई थी । साजिद मुस्लिम और ये हिन्दू थी जिसकी वजह से शादी के बाद इन्होनें अपना नाम बदल कर शना नाडियावाला कर लिया।     

 लेकिन इनकी आकस्मिक मौत ने पूरा भारत और साथ बॉलीवुड को आश्चर्य में डाल दिया था। बताया जाता है कि दिव्या भारती अपने फ्लैट में फैशन डिजाइनर निता लुल्ला और अपनी एक नौकरानी के साथ थी और उन्होने ड्रिंक किया हुआ था। उसके बाद वो खिड़की पर बाहर की ओर पैर करके बैठी थी । वहाँ मौजूद लोगो का मानना है कि खिड़की में ग्रिल ना होने की वजह से उनका पैर फिसल गया और वो गिर गई। जिसकी वजह से  उनको गंभीर चोट लगी और अस्पाताल पहुचते ही उनकी मृत्यु हो गयी। मात्र 19 साल की उम्र में ही इन्होने दुनिया को अलविदा कह दिया । बताया जाता है कि इनकी मृत्यु के बाद इनकी नौकरानी जो वहाँ मौजूद थी उनकी भी एक महीने के बाद मृत्यु हो गयी।

​2. परवीन बॉबी -

​इन्हे 1970 के दशक अपने ग्लैमर और बेहतरीन अभिनय की वजह से जाना जाता है। इन्होने उस दशक के सर्वश्रेष्ठ अभिनेताओ के साथ फिल्म किया। इन्होने कई सुपरहिट फिल्में भी दी। इन्होने कभी शादी नहीं की थी । उन्होने 50 से भी अधिक फिल्मों में काम किया । इतनी बेहतरीन अभिनेत्री की भी मौत एक रहस्य बन कर रह गयी। बताया जाता है कि उनकी मृत्यु के तीन दिन बाद इनके मृत्य की खबर लोगो को मिली। औऱ ये खबर उनके सोसइटी के लोगो ने दी जब उन्होने देखा कि तीन दिन से उनके दरवाजे पर अखबार और दूध का पैकट पड़ा है और किसी ने उसे उठाया तक नहीं है, तब उन्होने पुलिस को खबर की । मात्र 55 साल की आयु में ही इनकी मृत्यु हो गयी

​3. गुरू दत्त -

19 वीं दशक के बेहतरीन अभिनेता, निर्देशक एवं फिल्म निर्माता में से एक है गुरू दत्त । इनका वास्तवित नाम वसन्त कुमार शिवशंकर पादुकोणें था। इनकी फिल्मों से इनकी बहुचर्चित कागज के फूल को टाइम पत्रिका के 100 सर्वश्रेष्ठ फिल्मों की सूचि में शामिल किया गया है। इन्हे भारत का ऑनर्स वेल्स भी कहा जाता है। 2010 में उनका नाम सीएनएन के 25 सर्वश्रेष्ठ एशियाई अभिनेताओं के सूचि में भी शामिल है। इतने सर्वश्रेष्ठ एक्टर होने के बाद भी इनकी मृत्यु बहुत ही रहस्यमय तरीके से हुई। बताया जाता है कि 10 अक्टूबर 1964 को इनका मृत्य शरीर इनके बेड रूम में पाया गया, इनकी मृत्यु का कारण बताया गया कि इन्होने खूब सारी नीद की गोलिया खा ली थी और खूब सारी शराब पी ली थी जिसकी वजह से इनकी मृत्यु हो गयी। इनके बारे में ये भी बताया जाता है कि इन्होने इससे दो बार पहले भी आत्महत्या करने की कोशिश की थी।

​4. जिया खान -

बॉलीवुड के तीन सुपर-हिट फिल्मे देने के बाद भी जिया खान इतनी हिट ना हो सकी। बताया जाता है कि उनके फ्लॉप होने बाद उनको काम मिलना बंद हो गया। वो गुमनामी की दुनिया में खो गयी।

लेकिन अचानक एक दिन उनकी मृत्यु की खबर सामने आई किसी ने कहा कि उन्होने सुसाइड किया है तो किसी ने कहा उनका मर्डर हुआ है कितने ही लोगो का मानना है कि प्रेम संबधो के कारण या डिप्रेशन के कारण। एक साल तक ये गुत्थी बनी रही कोई सुलझा नहीं पाया और आज इनकी भी मृत्यु एक रहस्य बनकर रह गयी है।

​5. मधुबाला -

मधुबाला बॉलीवुड की एक ऐसी अभिनेत्री थी जिनकी खुबसुरती की लोग आज भी प्रंशसा करते नहीं थकते है, उनके एक्सप्रेशन के लोग आज भी दिवाने है। मधुबाला का पूरा नाम मुमताज बेगम जहाँ देहलवी था, इनका जन्म स्थान दिल्ली था। उनकी पहली मूवी बसन्त थी। इस मूवी में उन्होने बाल कलाकार की भूमिका निभाई थी। इस मूवी के बाद ही इनका नाम मधुबाला पड़ा। इसके बाद इन्होने केदार नाथ में पहली बार मुख्य भूमिका निभाई थी। उनको बॉलीवुड सिनेमा में सिनेमा की सौन्दर्य देवी के नाम से भी जाना जाता था। मधुबाला के कुछ फिल्मे फ्लॉप भी रही थी। इसके बाद भी उन्होनें हार ना माना और पुनः प्रयास किया जिसकी वजह से फिर से उनकी फिल्मे हिट होने लगी।

 इनका विवाह किशोर कुमार के साथ हुआ था। विवाह के कुछ साल बाद ही इनकी मृत्यु हो गयी ।लोगो का मानना था। कि इनकी मृत्यु दिल में छेद होने के कारण हुई है। उनकी मृत्यु इसलिए भी रहस्यमयी बन गयी क्योकि जब इनकी मृत्यु हुई थी उससे कुछ महीने पहले ही उन्होने अपना जन्मदिन मनाया था। बताया जाता है कि उनके मृत्यु के समय उनके पास कोई नहीं था। और एक दिन अचानक खबर आयी की मधुबाला नहीं रही। मात्र 36 साल की आयु में ही इन्होने दुनिया को अलविदा कह दिया।

​6. सिल्क स्मिता -

साउथ फिल्मो की जानि मानी अभिनेत्री सिल्क स्मिता 1970 के दशक में इनका जादू दर्शको के सिर पर चढ़ कर बोलता था। वो इतनी बेहतरीन अभिनेत्री थी उनके नाम पर ही फिल्मे चल जाती थी।

लेकिन मात्र 36 साल की ही उम्र में ही सिल्क स्मिता की मौत ने दक्षिण फिल्म इंड्रस्टी को आश्चर्य में डाल दिया। 23 सितंबर 1996 को विजयलक्ष्मी उर्फ सिल्क स्मिता का मृत्य शरीर उनके घर में पंखे से लटका मिला। पुलिस को इस बात के पुख्ता सबूत ना मिले की ये आत्महत्या थी या मर्डर। पुलिस को तेलगु में एक सुसाइड नोट मिला था। लेकिन उसे भी समझा नहीं जा सका और उनकी मृत्यु एक रहस्य बन कर रह गयी।

​7. शिखा जोशी -

चक दे इंडिया और बीए पास जैसी फिल्मो में काम कर चुकी । अभिनेत्री शिखा जोशी की मौत भी एक रहस्य बन कर रह गयी । कहा जाता है कि वे फिजिकल एक्सप्लॉयटेशन का शिकार होने  की वजह से उन्होनें 2015 में आत्महत्या कर ली।  

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भारत के ऐसे राज्य जहाँ हिन्दू अल्पसंख्यक है

हम सब ये जानते है, कि भारत एक ऐसा देश है, जहाँ पर हर प्रकार के धर्म से जुड़े लोग रहते है, जैसे कि- हिन्दू धर्म, जैन धर्म, सिक्ख धर्म, बुद्ध धर्म, ईसाई धर्म और मुस्लिम धर्म तथा अन्य काफी  धर्मो के लोग है। जिसकी वजह से भारत के विभिन्न धर्म और संस्कृति ने विश्व में अपनी एक अलग ही पहचान बनायी है।

​भारत को एक हिन्दू प्रधान देश भी कहा जाता है, क्योकि भारत कि 80 प्रतिशत आबादी हिन्दू है, लेकिन क्या आप जानते है, कि भारत में भी ऐसे कई से शहर है। जिनमें हिन्दुओं की संख्या दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है। अगर हम ये कहे कि हिन्दु वहाँ अल्पसंख्यक के रूप में है तो गलत नहीं होगा।

 चलिए हम बताते है आपको की भारत के वे कौन-से राज्य है, जहाँ हिन्दुओं की संख्या बाकि धर्म के लोगो की अपेक्षा कम है तथा हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग अल्पसंख्यक है।

देश में बहुत से पत्रकारों द्वारा ये अफवाह फैलाया जा रहा है की देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने का सडयंत्र चला रही है मोदी सरकार, लेकिन जमीनी हालत क्या है चलिए आज जानते है।

भारत में ऐसे राज्यो तथा केन्द्रशासित प्रदेशो की कुल संख्या 7 है -

​1. लक्ष्यद्वीप -

​लक्ष्यद्वीप भारत का एक केन्द्रप्रशासित प्रदेश है, जहाँ मुस्लिम धर्म की अपेक्षा हिन्दुओं की संख्या बहुत कम है। आकड़ो की माने तो यहाँ मुस्लिम आबादी 96.6 प्रतिशत वही हिन्दुओ की आबादी 2.8 प्रतिशत है।

​2. जम्मू एवं कश्मीर -

जम्मू-कश्मीर कौन नहीं जानता है, जम्मू-कश्मीर भारत का एक ऐसा राज्य है, जहाँ हिन्दू अल्पसंख्यक के रूप में है। यहाँ मुस्लिमो की अपेक्षा हिन्दुओं की संख्या काफी कम है। जम्मू-कश्मीर में जहाँ मुस्लिमों की संख्या 68.3 प्रतिशत है, वही हिन्दुओ की संख्या 28.4 है।

​3. अरूणांचल प्रदेश -

​अरूणांचल प्रदेश का अर्थ होता है, हिन्दी में उगते सूर्य का पर्वत, जिसमें अचल का मतलब पर्वत होता है। इस प्रदेश के लोग भी तिब्बती-बर्मी मूल के है। जिसकी वजह से यहाँ पर ईसाईयों की अपेक्षा हिन्दुओ की संख्या कम है। आकड़ो की माने तो यहाँ ईसाईयो की संख्या 30 प्रतिशत और वही हिन्दुओ की संख्या 29 प्रतिशत है।

​4. नागालैण्ड -

​यह भारत का एक उत्तरी पूर्वी राज्य है। नागालैण्ड में कुल 16 जनजातियाँ रहती है। नागालैण्ड भारत के उन तीन राज्यो में से एक ऐसा राज्य है। जहां पर हिन्दुओ की अपेक्षा ईसाईयो की संख्या सबसे ज्यादा है। आकड़ो की माने तो यहाँ ईसाईयो की संख्या जहाँ 87.9 प्रतिशत है, वही हिन्दुओ की संख्या 8.8 प्रतिशत है।

​5. मिजोरम -

​ये भारत के पूर्व और दक्षिण में म्यांमार और पंश्चिम में बंग्लादेश के बीच स्थित होने के कारण ये पूर्वोत्तर में मिजोरम सामरिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण राज्य है। यहां पर भी नागालैण्ड की तरह ही ईसाई धर्म से जुड़े लोगो की आबादी सबसे अधिक है। आकड़ो की माने तो यहां 87.2 प्रतिशत ईसाई तथा 2.8 प्रतिशत हिन्दू रहते है।

​6. मेघालय -

​मेघालय का हिन्दू में अर्थ होता है बादलों का घर। तथा ब्रिटिश राज के समय तात्कालीन अधिकारियों द्वारा इसे पूर्व का स्काटलैण्ड भी कहते है। ये भी नागालैण्ड और मिजोरम की तरह ही उस राज्य में आता है। जहाँ हिन्दुओ की तुलना में ईसाई धर्म को मानने वाले लोगो की संख्या सबसे अधिक है। आकड़ो की माने तो यहाँ ईसाईयो की संख्या 74.6 प्रतिशत है, वही हिन्दुओ की संख्या 11.5 प्रतिशत है।

​7. पंजाब -  

​भारत में पंजाब को अन्न भंडार तथा भारत में सबसे अधिक प्रति व्यक्ति आय के लिए भी जाना जाता है। ये बात हर कोई जानता है, पंजाब में सिक्खों की संख्या हिन्दूओ की अपेक्षा काफी ज्यादा है। आकड़ो की माने तो पंजाब में हिन्दुओं ​की संख्या 38.5 प्रतिशत तथा वही सिक्खो की संख्या 57.7 प्रतिशत है।

भारत में कई धर्मो के लोग एक साथ मिलकर रहते है तथा भिन्न धर्मो तथा धारणाओं को मानने वाले लोगो के रहने के बाद भी इस देश में लोग अपनी मातृभूमि से बहुत प्रेम करते है। तथा अन्य सभी देशों में भारत की एकता संप्रभुता की मिशाल दी जाती है।

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तमकुही राज से जुड़े गौरान्वित इतिहासिक तथ्य

भारत में आज भी ऐसे बहुत से गाँव या शहर है जहाँ बहुत सी सराहनीय घटनाये हुई है जो हमारे देश का नाम गर्व से ऊचाँ कर देती है लेकिन ये घटनाये इतिहास ही बनकर रह गयी है, इनके बारे में कोई नहीँ जानता ना ही इनका अब कोई जिक्र करता है। ऐसी ही एक घटना है सन् 1767 की उत्तर-प्रदेश के शहर कुशीनगर के  तमकुही राज से जुड़ी है।

"कुशीनगर ये वही पावन स्थल है जहाँ गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ था। यह बौद्ध धर्म से जुड़े लोगो का पवित्र पालि-बौद्ध तीर्थस्थल है।"

चलिए हम आपको ऐसी ही एक और कुशीनगर की ऐतिहासिक घटना के बारे में बताते है, कुशीनगर में  तमकुही राज है, इस शहर का इतिहास भी कुछ कम रोचक नहीं है इस शहर से जुड़े इतिहास के बारे में यहाँ के निवासियों से सुनने को मिलता है और कुछ इतिहासकारो ने भी इस घटना के बारे में जिक्र किया है

queen palace

​यह घटना सन् 1767 की है, जब भारत पर अंग्रेजो का राज था यहाँ पर राजा फतेह शाही का राज्य था। उन्होने अंग्रेजो की शर्तो को ना मानते हुए उन्हे कर देने से मना कर दिया था तथा जिससे क्रोधित होकर ब्रिट्रिश हुकुमत ने उन्हें विद्रोही घोषित कर दिया था।

​अंग्रेजो की खिलाफत करते हुए वहाँ के निवासियों के समर्थन के आधार पर उन्होनें तमकुही राज में अपने राज को स्थापित किया तथा 23 वर्षो तक अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ विद्रोह की भावना जागृत रखते हुए अपने राज्य का विस्तार करते रहे। इतने सालो तक राज्य करने के पश्चात राजा ने 1790 में राज्य की सत्ता अपने पुत्र को दे दी तथा उसे राज्य गद्दी देकर खुद सन्यास के लिए महाराष्ट्र चले गये। राजा फतेह शाही की मृत्यु 1836 में हो गयी परन्तु उनकी मृत्यु के पश्चात भी अंग्रेजो में उनका खौफ बना रहा। राजा के वीर गाथाओ का जिक्र भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रथम वीर नायक नामक पुस्तक में हुआ है।

इसी राज्य के एक अन्य राजा जिनका नाम इन्द्रजीत प्रताप शाही था उन्होने भी अपने शासन काल में प्रजा के हित में काफी काम किये और ख्याति प्राप्त की, राजा इन्द्रजीत प्रताप शाही ने अपने राज्य में शिक्षा, चिकित्सा और कानून व्यवस्था की बहाली के लिए कई सारे प्रयास किये जो कि सराहनीय थे, उन्होने सन् 1925 में ही पाँच वर्ष से ऊपर बच्चो को अनिवार्य रूप से शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था की तथा इसके लिए उन्होने अपने राज्य में कई सारे विद्यालयो तथा मदरसो का निर्माण कराया जिससे की उच्च शिक्षा जन-साधारण में आसानी से पहुँच सके।

राजा इन्द्रजीत प्रताप शाही ने उच्चतम कोटी की शिक्षा देने के लिए अपने राज्य में राजा फतेहशाही के नाम पर फतेह मेमोरियल इन्टर कालेज की स्थापना की राजा की अचानक से हुई मृत्यु तथा कुछ राजनीति कारणो व आजादी के पश्चात लोग तंत्र की स्थापना के कारण इस राज्य का पतन हो गया।

 राजा इन्द्रजीत प्रताप शाही इस राज्य के अन्तिम राजा थे। इस राज्य का इतिहास यहाँ पर स्थिति राज्य के अवशेषो खुद ही बयान करते है।

यह राज्य उत्तर प्रदेश तथा बिहार की सीमा पर स्थित नारायणी नदी के किनारे बसा हुआ है, तमकुही राज के निवासी अपनी पुरानी विरासत पर गर्व करते है, यहाँ के लोग मुख्यतः कृषि कार्य से जुड़े है तथा इसी से सम्बन्धित व्यापार से भी जुड़े है। वर्तमान समय में यह राज्य अपने यहाँ दशहरे के दिन होने वाले पशुमेले के लिए विख्यात है।

"सन् 1980 के पश्चात् इतिहास कारो ने इस के इतिहास को जनसाधारण के बीच लाने के प्रयास शुरू किये।"

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पाकिस्तान में हिंदुओ की हालत

पाकिस्तान की करतूत किससे छुपी है, आये दिन वहाँ से कोई ना कोई ऐसी घटनाये सामने आती है, जो मानव जाति को शर्मसार कर देती है, हमने पहले भी कई बार सुना है कि वहाँ पर रह रहे हिन्दुओ और अन्य धर्म के लोगो के साथ उचित व्यवहार नहीँ किया जाता है तथा जिसे सुन रूह काप सी जाती है, जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते है। 

हालहि में पाकिस्तान की एक और शर्मनाक हरकत सामने आई है, हर दिन कोई ना कोई ऐसी खबर जरूर पाकिस्तान से आती है जो दिल दहला देती है, ये बात किसी से नहीँ छुपी है कि पाकिस्तान में किसी को भी धर्म के मामले में स्वतंत्रता नहीं प्राप्त है, वहाँ आये दिन कोई ना कोई ऐसा मामला सामने आता है जिससे पता चलता है कि वहाँ पर अन्य धर्म के लोगो पर अत्यचार किया जाता है।

खबरो की माने तो ऐसा ही एक ताजा मामला सामने आया है कि पाकिस्तान में कई ऐसे दलित परिवार है, जो वहाँ हो रहे उनके ऊपर अत्याचारो से इतना तंग आ चुके थे कि उन्होंने अपना धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया उन्हे लगा शायद ऐसा करने से उनके ऊपर हो रहे अत्याचार कम हो जाये लेकिन ऐसा नहीँ हुआ उनके ऊपर हो रहा अत्याचार कम नहीँ हुआ जबकि उनके ऊपर हो रहा  अत्याचार और बढ़ गया, अब वहाँ वो लोग जो दलित थे जिन्होने ईसाई धर्म अपनाया था, उनसे पाकिस्तान में नाले तथा सीवर साफ कराया जा रहा है और ना ही उनको सेफ्टी का समान दिया जा रहा है बिना मास्क और ग्लव्य दिये और बिना कपड़े पहने उन्हे गंदे नाले में उतरने के लिए मजबूर कर दिया जाता है तथा जिससे हालहि में पाकिस्तान में कई ईसाई सफाई कर्मियों की मौत की खबरे आई है।

एक न्यूज पोर्टल के हवाले से यह खबर आई है कि पाकिस्तान में एक ईसाई सफाई कर्मी जिसका नाम एरिक जमशेद है तथा जिसके पूर्वजो ने हिन्दु धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाया था उसके साथ भी यही घटना घटी रिपोर्टो की माने तो पिछले साल जुलाई के महीने में पाकिस्तानी सेना ने नालो की सफाई करने के लिए सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति करने से सम्बन्धित एक विज्ञापन छपवाया तथा उसमें केवल ईसाई धर्म से सम्बन्धित लोगो के नियुक्ति की बात कही गयी, लेकिन बाद में वहाँ की जनता द्वारा इसका विरोध करने पर यह विज्ञापन हटा दिया गया।

धर्म के आधार पर यह कुंठित विचारधारा मानवजाति को शर्मसार करती है।

पाकिस्तान के कई बड़े शहरो की नगर पालिकाओ में साफ-सफाई से सम्बन्धित सारे काम ईसाईयो से ही कराये जाते है, यहां तक की इन कर्मचारियों की जान की परवाह किये बिना उन्हे किसी सुरक्षा साधन के बिना ही गन्दे नालो में उतार दिया जाता है तथा उन्हे अपने हाथो से ही बिना ग्लप्स के ही गन्दा कचरा उठाना पड़ता है, इस कचरे में मल-मूत्र तथा शहर के नालो से आने वाला सारा कचड़ा शामिल होता है।

इतने बड़े शहरो में काफी सारा कचरा जमा होता है तथा नालो की  सफाई में काफी ज्यादा मेहनत लगती है और सुरक्षा के इन्तजाम ना होने पर जान जाने का भी जोखिम होता है तथा एक दिन तीन से अधिक नालो की सफाई करने के बाद भी इन्हे 500 रूपये तक भी नहीँ मिलते है।

इतने बड़े शहरो में काफी सारा कचरा जमा होता है तथा नालो की  सफाई में काफी ज्यादा मेहनत लगती है और सुरक्षा के इन्तजाम ना होने पर जान जाने का भी जोखिम होता है तथा एक दिन तीन से अधिक नालो की सफाई करने के बाद भी इन्हे 500 रूपये तक भी नहीँ मिलते है।

वँहा के एक समाजिक कार्यकर्ता ने जिनका नाम जेम्स गिल है उन्होने इन लोगो की बहाली के लिए और इनके ऊपर हो रहे अत्याचार को देखते हुए, पाकिस्तान की सरकार के सामने इनकी बाते रखी परन्तु ये सफाई कर्मचारी ज्यादा पढ़े लिखे ना होने के कारण अपने ऊपर हो रहे इस अत्याचार का विरोध भी नहीं कर पाते जिसकी वजह से इनकी आवाज वहाँ दबा दी जाती है।

  इन सफाई कर्मचारियो के आर्थिक हालात इतने खराब है कि थोड़े से रूपये के लालच में ही इन नालो में बिना किसी सुरक्षा के घंटो तक काम करने के लिए तैयार हो जाते है, पैसे की कमी तथा अपने परिवार का पेट भरने के लिए ये किसी भी प्रकार की तकलीफ झेलने को तैयार हो जाते है।

  इनमें से कई सफाई-कर्मचारियो का कहना है कि इनके पूर्वज हिन्दू थे परन्तु सामाजिक भेदभाव से बचने के लिए इन्होने ईसाई धर्म अपनाया लेकिन इसपर उन्हे इस प्रकार के भेदभाव का सामना करना पड़ता है। मजहब के आधार पर लोगो के साथ होने वाला यह बर्ताव लोगो की जिन्दगी को जहनुम बना देता है।

उनका कहना है कि पाकिस्तान में मुसलमान कर्मचरियों से कोई भी गन्दा काम नहीँ करवाया जाता है, उनसे सिर्फ वहाँ पर सड़को की मामूली साफ-सफाई करायी जाती है, जबकि ईसाई कर्मचारियों को इतना मजबूर कर दिया जाता है कि उनको अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए अपनी जिंदगी को जोखिम में डाल कर यह काम करना पड़ता है।

​गटर में काफी देर तक काम करने की वजह से उसमें से निकलने वाली मेथेन गैस की वजह से कभी-कभी उनकी जान भी चली जाती है और इसके वजह से इनको कई सारी बिमारियों का सामना भी करना पड़ता है और उनके बीमार होने पर उनके पास पैसे की कमी के कारण उचित इलाज मिलने में कठिनाई होती है जिसके वजह से उनको अपनी जान गवा देनी पड़ती है।

विश्व की कई बड़ी संस्थाओं तथा यूएन ने भी पाकिस्तान को उसके यहाँ रहने वाले अल्पसंख्यको की स्थिति सुधारने तथा उनके मानव अधिकार की रक्षा के क्षेत्र में कार्य करने को कहा है तथा वर्तमान स्थिति पर चिन्ता जताई है परन्तु वहाँ की सरकार इस तरह के किसी भी बात को मामने को तैयार नहीं होती तथा इन घटनाओ को नजरअंदाज करती है और अपनी गलती हमेशा छुपाती है।

रामायण के किरदारो की अनसुनी कहानियाँ

 रामानन्द सागर द्वारा बनाई रामायण लोगो के लिए ना सिर्फ एक शो बल्कि लोगो  की आस्था का एक प्रतीक बन चुका है, रामायण के इस प्रसारण नें कई लोगो के  मन रामायण के प्रति अथाह भक्ति भाव उत्पन्न कर दिया है तथा इसमें उपयोग होने  वाले संगीत तथा गाने लोगो के मनो में एक विशेष छाप छोड़ते है, रविन्द्र जैन द्वारा  गाया गये गीत ने दर्शको के मन को भाव-विभोर कर देता है। वर्तमान समय में भी  इसका दूर्दशन पर प्रसारण करने पर यह इस भाँति सफल रहा मानो तुलसीदास  स्वंय ही राम जी के इस महान कथा का वर्णन कर रहे हो। रामायण की अनसुनी कहानियाँ

राम जी भले ही रावण से जीत गये, लेकिन 

राजा की उपाधि पाते ही वो अपनी प्रजा से हार गये।

पहली बार इसका कब प्रसारण हुआ -

रामानन्द सागर द्वारा रचित यह रामायण 25 जनवरी सन् 1987 से 31 जुलाई सन् 1988 को रविवार वाले  दिन 9.30 को डीडी नेशनल पर प्रथम बार प्रसारित हुई थी, बहुप्रचलित टी.वी. सीरिज में कुल 78 एपिसोड है तथा इसने भारत में सबसे ज्यादा देखे जाने वाले शो की उपाधि प्राप्त की है, इस शो ने हर एपिसोड के प्रसारण पर दूर्दशन को 40 लाख तक की कमाई उस समय हुई थी।

वर्तमान समय में इसका प्रसारण और इसके द्वारा बनाये  गये रिकार्ड -

​वर्तमान समय 28 मार्च से 2 मई 2020 के बीच दूर्दशन द्वारा इसका पुनः प्रसारण करने पर इसने टी.वी जगत से जुड़े सभी रिकार्ड को तोड़ कर रख दिया, लोगो द्वारा इसे इतना स्नेह मिला कि वर्तमान समय में इसके प्रसारण के दौरान वह एपिसोड जिसमें लक्ष्मण तथा मेघनाथ के मध्य हुए युद्ध को दिखाया गया है उसने टेलीवीजन जगत के सभी रिकार्ड को तोड़कर 7.7 करोड़ दर्शको के साथ विश्व में एक नया किर्तिमान स्थापित किया। वही जून 2003 में लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में भी अपना नाम दर्ज कराया, सबसे ज्यादा दर्शको द्वारा देखे जाने वाले पौराणिक धारावाहिक में।

लोगो का यह कहना है कि दूर्दशन ने रामायण नहीं बल्कि रामायण ने दूर्दशन को प्रसारित किया है।

रामायण से जुड़े कलाकरों की वर्तमान जिन्दगी -

रामानन्द सागर द्वारा प्रसारित रामयण में कलाकारो ने जो किरदार निभाया वह सराहनीय है, बड़े से बड़ा या छोटे से छोटा कोई भी किरदार हो इस कदर निभाया है कि ऐसा लगता है कि इस हम सब वास्तव में ही सतयुग में पहुँच गये हो।रामायण की अनसुनी कहानियाँ

रामजी का किरदार -

रामानन्द सागर जी द्वारा प्रसारित रामायण में राम जी का किरदार श्री अरूण गोविल जी ने  निभाया है, उन्होने जिस कदर इस किरदार को निभाया है शायद ही कोई निभा पाता, उन्होने समय समय पर अपनी मुस्कान के द्वारा राम जी के किरदार को और लोकप्रिय बना दिया, दर्शक उन्हे उनके वास्तविक नाम से ज्यादा श्री राम प्रभु के नाम से  जानते है जब भी राम जी का नाम लिया जाता है सबसे पहली छवि अरूण गोविल सर की ही  आती है।

अरूण सर ने अपने द्वारा दिये गये एक इन्टरव्यू में बताया कि जब उन्हे पता चला कि रामानन्द सागर जी रामायण महाकाव्य पर टी.वी सिरियल बना रहे है तो वो उनके पास गये और उनसे कहा मुझे राम जी का किरदार करना है तब रामानन्द सागर सर ने उनसे कहा कि आप और बाकि किरदार कर लीजिए उन्होने करने से मना कर दिया और कहा कि मै करूगा तो सिर्फ राम जी का ही किरदार बाद में उन्हे खुद रामानन्द सागार सर ने इस रोल को करने के लिए बुलाया और उन्होने  सच में ही ऐसा किरदार निभाया मानो उन्हें रामजी के रोल के लिए ही बनाया गया है।

अरूण गोविल का जन्म उत्तर प्रदेश के शहर मेरठ में हुआ है, स्कूल समय से ही अभियन और नाटक करते थे, उन्होने राजश्रीवालो की पारिवारिक फिल्मो में भी काम किया है लेकिन इनको वास्तविक पहचान रामानन्द सागर जी द्वारा निर्देशित रामायण में श्री राम जी के किरदार से ही मिली, इन्होने हिम्मतवाला, कानून और लाखा जैसी फिल्मो में भी काम किया है।

माता सीता का किरदार -

रामानन्द सागर द्वारा निर्मीत रामायण में सीता माता का किरदार दीपिका चिखलिया जी ने किया है, उन्होने इस किरदार को इस प्रकार निभाया की मानो स्वंय सीता माता हो, फिर चाहे रावण  के द्वारा उनके हरण के समय रावण से उनका संवाद हो या अशोक वाटिका में उनके द्वारा निभाया गया किरदार हो उन्होने हर एक किरदार से दर्शको का दिल जीत लिया और एक अलग पहचान बना ली।

दीपिका जी ने हिन्दी, कन्नड़, तमिल, बंगाली और भोजपुरी फिल्मो में भी काम किया है, लेकिन दीपिका जी को आज भी लोग सीता माता के रूप में ही पहचानते है। दीपिका जी का विवाह हेमंत टोपीवाला से जी के साथ 23 नवंबर 1991 में हुआ था, इनकी 2 बेटिया है।

लक्ष्मण जी का किरदार -

रामानन्द सागर जी द्वारा निर्मित रामायण में लक्ष्मण जी का किरदार सुनील लहरी जी ने निभाया है, सुनील सर ने लक्ष्मण जी के किरदार को इस कदर निभाया कि दर्शको के दिलो में एक अलग ही पहचान बना लिया, फिर चाहे उनका और परशुराम जी का संवाद हो या उनका और मेघनाथ के युद्ध के समय उन्होने जो संवाद बोले जैसे मानो स्वंय लक्ष्मण जी हो।

एक इण्टरव्यू में सुनील लहरी जी ने बताया है कि रामानन्द सागर उन्हे अपना छठा बेटा मानते थे, रामायण में लक्ष्मण के क्रोध के भांति ही वो अपनी निजी जिंदगी में भी काफी क्रोधी स्वभाव के है जो उन्हें इस किरदार के लिए और अधिक उपयुक्त बनाता है।

इनका जन्म 9 जनवरी 1961 में मध्य प्रदेश में हुआ था, इन्होने रामायण के अलावा दादा-दादी की कहानियाँ तथा विक्रम बेताल तथा काफी अन्य धारवाहिको में भूमिकायें निभाई है, इन्होने जब लक्ष्मण जी का किरदार निभाया तब यह 30 वर्ष के थे।

रावण का किरदार -

रामानन्द सागर द्वारा निर्मीत रामायण में रावण का किरदार निभाने वाले अभिनेता का नाम अरविन्द त्रिवेदी है, लोगो कि माने तो रावण के इस किरदार के द्वारा वह रावण को पुनः पृथ्वी पर ले आये थे, रावण के हाव-भाव तथा उसकी हँसी को इस प्रकार बखूबी निभाया की बच्चे तक उनकी नकल करने लगे थे, इससे जुड़ा यह एक रोचक खिस्सा है कि राम द्वारा रावण का वध करने पर एक गाँव में उसकी मौत का शोक मनाया गया, जो कि अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है।

वास्तविक जीवन में वह श्री राम जी के बहुत बड़े भक्त है और वो रामायण में केवट का रोल करना चाहते थे। वर्तमान दिनो में वो राम नाम जप अपना जीवन व्यतीत कर रहे है।

हनुमान जी का रोल -

 रामानन्द सागर जी द्वारा निर्मीत रामायण में हनुमान जी का रोल दारा सिंह जी ने निभाया था, उन्होने बताया था कि जिस दिन उन्हे रामायण का प्रस्ताव आया उसी दिन रात में उनके सपने में हनुमान जी आये थे।

  इनका जन्म 19 नवम्बर 1928 में अमृतसर में हुआ, दारा सिंह जी एक प्रसिद्ध भारतीय पहलवान थे तथा यह प्रथम राज्यसभा सदस्य मनोनित हुए जो कि किसी खेल जगत से सम्बन्धित हो उन्होने हिन्दी, पंजाबी फिल्मो में डायरेक्टर प्रोड्यूसर तथा लेखन कार्य के साथ कई फिल्मो तथा टी.वी जगत में अभिनेता की भाँति कार्य किया, इनका पूरा नाम दीदार सिंह रनधावा था।

अन्य मुख्य कलाकार -

भरत -

​रामानन्द सागर जी द्वारा निर्मीत रामायण में भरत जी का रोल करने वाले संजय जोग जी की मृत्यु मातृ 40 वर्ष की अवस्था में हो गई, रामानन्द सागर जी ने इनकी आँखे देख कर इन्हे भरत का रोल दिया तथा उन्होने इस रोल को बखूबी निभाया तथा दर्शको को जीवन जीने की अलग दृष्टि प्रदान की।

मेघनाथ -

मेघनाथ का रोल करने वाले विजय अरोरा ने दर्शको के दिलो पर ऐसा छाप छोड़ा मानो की स्वंय मेघनाथ सामने आ प्रकट हुआ हो, इसके पहले इन्होने कई फिल्मो में काम किया जिनमें यादो की बारात एक प्रच्चलित फिल्म थी।

  विजय अरोरा का जन्म 27 दिसम्बर 1944 को अमृतसर में हुआ और 2 फरवरी 2007 में इनकी मृत्यु हो गई।

सुग्रीव -

​  सुग्रीव जी का किरदार निभाने वाले श्याम कलानी ने भी लोगो का काफी दिल जीता इनकी मृत्यु हालहि में 6 अप्रैल को कैंसर के कारण पंचकुला के नजदीक कालका में हुई।

अंगद -

​अगंद का किरदार निभाने वाले अभिनेता बसीर खॉन ने रामायण से अपने करियर की शुरूआत की थी, इन्होने इस भाँति इस किरदार को निभाया जैसे स्वयं अंगद के किरदार के लिए ही इनका जन्म  हुआ हो।

कुम्भकरण -

कुम्भकरण का अभिनय करने वाले अभिनेता नलिन दवे ने 50 वर्ष में ही इस संसार को अलविदा कह दिया, रामायण में एक छोटे से किरदरा निभाते हुए उन्होने काफी लोगो के दिलो को जीता।

बाल्मीकी -

रामायण मे एक्टर विजय कशिश जी ने बाल्मीकी के साथ-साथ भगवान शंकर तथा रावण के ससुर मयदानव का किरदार भी निभाया यह जानकर आपको आश्यर्च होगा भगवान शंकर किरदार निभाते समय इनके गले में लिपटा सर्प राज असली था।

रामायण से जुड़ी कुछ रोचक बाते -

  1. प्रेम सागर जी ने बताया की रामायण के दौरान वो गाँव में ढ़ोल-नगारे बजाकर जुनियर कलाकारो को एकत्रित करते थे।
  2. लव-कुश की कहानी की मांग उठने पर भी रामानन्द सागर जी इसके लिए तैयार नहीं थे क्योकि कई लोग इसे एक काल्पनिक कहानी मानते थे तथा इस कहानी पर विवाद के चलते रामानन्द सागर जी पर 10 साल कोट केस भी चला।
  3. रामायण की शूटिंग 550 दिनो से ज्यादा दिनो तक चलती रही।
  4.  रामायण में ​असलम खॉन एक ऐसे अभिनेता थे, जिन्होने कई सारे किरदार निभाये।

राम केवल एक नाम ना होकर एक ऐसा भाव बन गए जिसमें लोगो को एक आर्दश राजा, पिता, पुत्र, भाई और पति देखने को मिलता है, उन्होने लोगो को जीवन जीने का एक उचित मार्ग प्रदान किया।

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कोरोना से बचने के लिए ये देशी नुस्खे अपनाये और इम्युनिटी बढ़ाये।

वैसे तो दुनिया भर में किसी भी देश को अभी तक कोरोना के इलाज की खोज करने में सफलता नहीं मिली है ,लेकिन आप अपने इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत करके इससे खुद का बचाव कर सकते है ,आप आयुर्वेद के कुछ घरेलू नुस्खे अपना कर घर पर ही अपनी इम्युनिटी सिस्टम बढ़ा सकते है,चलिए हम आपको बताते है आप घर बैठे बैठे कैसे अपना इम्युनिटी सिस्टम बढ़ा सकते है।

विटामिन सी का उपयोग जरुर करे

1- खाने-पीने में निम्बू,संतरा,अमरुद,पपीता,टमाटर,आवला, पपीता और कीवी जैसे आदि फलों का इस्तेमाल करे।
 
2-सुबह खाली पेट नींबू-पानी से दिन की शुरुआत करे। 

"काढ़ा है काफी फायदेमंद"

1-खशी,जुखाम,बुखार और अन्य वायरल इन्फेक्शन में बेहद फायदेमंद है काढ़ा,

2-तुलसी ,काली मिच,सूखी अदरक,निम्बू और हल्दी को गरम पानी में अच्छी तरह उबाल ले और उसका काढ़ा बना ले अगर मुनक्का हो तो उसे भी काढ़े में डाल सकते है।


3-दिन में कम से कम दो बार जरूर पिए।


4- स्वादानुसार आप काढ़े में नमक भी डाल सकते है।

"स्टीम के प्रयोग से आराम मिलेगा"

​1-गले में खराश या खासी,जुखाम महसूस होने पर गरम पानी का भाप ले।

2-पानी में पुदीने के पत्ते या अजवाइन डालें।


3-पांच से सात मं तक दिन में कम से कम दो बार भाप लेना चाहिए ,इससे अगर गले में सूजन और दर्द होगा तो उसमे भी राहत मिलेगी।

" इस नुस्खे से सर्दी लगने में जल्दी राहत मिलती है"

अगर जुखाम छींक आ रही है तो आप प्याज के छोटे-छोटे टुकड़े कर ले और इन टुकड़ों को मोज़े में रख कर मोज़े को पहनकर रात में सो जाये इससे आपको सुबह जुखाम में काफी राहत मिलेगी।

"इस तरह से खुद को इंफेक्शन से बचाये"

​1-दिन में दो बार तिल या नारियल या सरसो का तेल या देसी घी को नाक के छिद्रों में लगाये।

2-दिन में एक या दो बार तिल या नारियल के तेल को मुंह में लेकर गलाला करे इसकी जगह गर्म पानी में नमक डाल कर भी गलाला कर सकते है।

ऐसे भी इम्युनिटी बढ़ा सकते है

​1-पुरे दिन गर्म पानी पिए।

2-रोज सुबह उठकर कम से कम 30 मिनट्स तक योग करे।


3-सुबह खाली पेट लहसुन का भी इस्तेमाल कर सकते है।


4-सुबह रोज एक चम्मच चमनप्रास के सेवन से भी इम्युनिटी बढ़ती है।


5-गरम दूध में हल्दी डाल कर दिन में दो बार पिए।

बरते यह सावधानी

​1-खाने को अच्छी तरह पक्का कर ही खायें।

2- नॉनवेज को अच्छी तरह उबालकर पका कर खाए।


3-कच्ची सब्जियां हो सके तो खाने से बचे।


"स्वस्थ रहें सावधान रहे"

जंहा दुनिया कोरोना से डर रही है वही भारत के आयुर्वेद चिकित्सा ने इसका तोड़ निकाल डाला है।

कोरोनावायरस ने दुनिया भर में कोहराम मचा रखा है, अब तक इस वायरस के इन्फेक्शन से 3800 से ज्यादा लोगो की मौत हो चुकी है वही, रिसर्च की गयी है जिसमे कई हैरान कर देने वाली आशंकाए जताई है ,इसमें कहा गया है की दुनिया में अगर इसकी रोकथाम नहीं की गई तो फिर आने वर्षो में 6 करोड़ 80 लाख लोगो की मौत हो सकती है .

रिसर्च के मुताबिक ,चीन और भारत में लाखो लोगो की जान जा सकती है,जबकि अमेरिका में भी दो लाख लोगो की मौत हो सकती है इसके अलावा ब्रिटेन में 64 हजार,जर्मनी में 79 हजार और फ्रांस में 60 हजार लोगो की मौत हो सकती है , रिसर्च के मुताबिक,दुनिया भर की ग्लोबल जीडीपी 2.3 ट्रिलीयन डॉलर्स तक पहुंच सकती है.

कोई भी वायरस हो और उसका इलाज हमारे ग्रंथो में न हो ऐसा हो नहीं सकता है हमारे आयुर्वेद चिकित्सा ने इसकी दवा खोज निकाला है ,कोरोना वायरस  से घबराये नहीं इस की दवा भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा ग्रंथों में वसाका नाम से वर्णित है -चीन में फैला हुआ कोरोना वायरस जो कि एक खतरनाक रूप में सामने आ रहा हैं, अब यह भारत मे भी फैल रहा हैं

कोरोना वायरस के संक्रमण के लक्षण

  1. तेज बुखार
  2. बुखार के बाद खांसी का आना
  3. बेचैनी, सिरदर्द और मुख्य रूप से श्वसन संबंधी परेशानी महसूस होना

भारतीय लोगों को कोरोना वायरस से डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि इसके रोग के लक्षणों का वर्णन हमारे प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में दिया हुआ है

आयुर्वेद में दवा का नाम वसाका (अरडूसा) नाम से उपलब्ध है तो आप इससे डरिये नहीं बस इन चीजों का इस्तेमाल करे और सयम से काम ले ये दवाएं कुछ इस प्रकार है।

कोरोना वायरस के आयुर्वेदिक निदान 

1) गोजिव्हादि क्वाथ 10 ग्राम,बैधनाथ महासुदर्शन चूर्ण 01 ग्राम, गिलोय की हरी ताजा लकड़ी 12 ईंच बड़ी, तुलसी पत्र 5 - 7, कालीमिर्च 3 - 4, सोंठ पाऊडर 1 ग्राम, अरडुसा के ताजा पत्र 4 - 5, हल्दी पाउडर 1 से 2 ग्राम  इन सबको मिलाकर 250 ML पानी मे मंद आंच मे धीरे धीरे ऊबाले शेष 15 - 20 ML बचने पर सूती सफेद वस्त्र से छान कर गुनगुनाना गुनगुनाना ही पीना है। लक्षणों से पिड़ित व्यक्ति को दिन में तीन चार बार दिया जा सकता है और स्वास्थ्य व्यक्ति को बचाव की दृष्टि से दिन मे एक बार ले सकता है।

(2). नमक या सफेद फिटकरी के पानी की भाप दिन में तीन चार बार लेनी चाहिए।

(3). प्रत्येक व्यक्ति को प्रति दिन तीन से पांच बार सरसों का तेल नांक के अंदर अंगुली से लगाते रहना चाहिए।

(4). गिलोय की हरी लकड़ी 12 ईंच, तुलसी के 8 - 10 पत्र , शुद्ध शहद एक चम्मच, एक ग्राम हल्दी पाउडर, एक ग्राम सोंठ पाउडर, 3 - 4 कालीमिर्च का पाउडर, इन सबको मिलाकर दिन में दो से तीन बार चाटना या पीना है।

(4) बैधनाथ तालिसादि चूर्ण 1 ग्राम,गोदंती भस्म 250 MG, सर्वज्वरहर लौह 250 MG,
शिर:शुलादि वज्र रस 250 MG, श्वासकुठार रस 250 MG, चंद्रामृत रस 250 MG, श्रृंगाराभ्र रस 250 MG,प्रती डोज इन सबका मिश्रण शहद के साथ दिन मे तीन चार बार लेवें।

(5). Tab - Fifatrol (Amil) एक एक गोली दिन मे तीन से चार बार गर्म पानी से लेवे।

(6).बैधनाथ एलादि वट्टी या मरिच्यादि वट्टी मे से कोई एक तरह की टेबलेट दिन में चार से छ बार चूसनी है।

(7). Sup - बैधनाथ कासामृत की तीन तीन चम्मच गुनगुनाना पानी के साथ दिन में तीन से चार बार लेनी है।

(8).बैधनाथ कंटकारी अवलेह या च्यवनप्राश स्पेशल की एक एक चम्मच दिन मे दो बार लेनी चाहिए।

यह सावधानियां अप्रैल माह तक रखें और स्वस्थ रहे,क्योंकि इस वायरस का गर्मिया में असर खत्म हो जाइएगा हमारे वैज्ञानिकों का कहना है तब तक आप इन सावधानियों का ख्याल रखे

(1). आईसक्रीम, कुल्फी, सभी प्रकार की कोल्ड ड्रिंक्स, सभी प्रकार के प्रिज़र्वेटिव फूड्स, डिब्बा बंद भोजन, मिल्क शेक, कच्चा बर्फ यानी गोला चुस्की, मिल्क शेक या मिल्क स्वीटनर 48 घंटे पुराने खाने से बचे क्योंकि कोरोना वायरस गर्मी से निष्क्रिय हो जाता है इस लिए तेज़ गर्मी यानी 35℃ से ज्यादा होने तक रुके।

(2).किसी से भी हाथ नहीं मिलाए, हाथ जोड़कर ही अभिवादन करे, ओर स्वीकार करें।

(3).नांक पर हर व्यक्ति वायरस रोधी मास्क लगाकर रखें।

(4).भोजन में नोनवेज (मांसाहार) से बचे। शुद्ध शाकाहारी भोजन का ही सेवन करें।

(5).भीड़ भाड़, मेले, धरने, प्रदर्शन जैसी जगहों से बचे या दूर रहें।

(6) कमसे कम यात्राएं करे।

(7) जो भी खाए उसको अच्छे से साफ़ कर ले ,अच्छे से उबालें और अच्छे से पका कर ही खायें।

(8)जिन लोगो को सर्दी जुखाम भुखार या खाँसी आ रहा है उनसे 3 फीट की दुरी से ही बात करे।

प्रत्येक औषधि जो लिखी गई है उसको अपने निजी आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह से भी ले सकते हैं। तथा औषधि की मात्रा आयु (उम्र) के अनुसार ही निर्धारित करे। इसमे लिखी गई मात्रा सामान्य युवा व्यक्ति के लिए लागु है।


अगर हम चाहे तो हर वायरस का डट कर सामना कर सकते है अगर सयम से और सावधानी से काम ले।

डाँ. तरुण कुमार त्रिपाठी
सहायक निदेशक
आयुर्वेद विभाग सीकर