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Rabindranath Tagore (रविन्द्र नाथ टैगोर) को उनकी रचना गीतांजलि के लिए नोबल मिलने की कहानी हैं बड़ी रोचक

Rabindranath Tagore Biography/ Rabindranath Tagore Death Anniversary/ रविन्द्रनाथ टैगोर जिन्होने हमारे देश का राष्ट्रगान जन गण मन लिखा हैं, शायद ही कोई होगा, जो इन्हें नहीं जानता होगा। रविन्द्रनाथ टैगोर जी 80 साल की उम्र में यूरीमिया नामक बीमारी की वजह से हमें अलविदा कह गये।

Rabindranath Tagore Biography-

रविन्द्रनाथ टैगोर की जीवनी:  रविन्द्र नाथ टैगोर को उनके माता-पिता प्यार से रबी कहकर बुलाते थे। वो अपनी माता-पिता की 13वीं संतान थे। कोलकाता के जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी में 7 मई 1861 में हुआ था। उनकी माता का निधन बचपन में ही हो गया था। पिता अक्सर यात्रा पर रहते थे। इसलिए रबी का पालन-पोषण नौकरो ने किया था। 

8 साल की उम्र में लिखी पहली कविता-

रविन्द्रनाथ टैगोर बचपन से ही साहित्य प्रेमी थे। उन्होने महज 8 साल की उम्र में ही अपनी पहली कविता लिख दी थी। और 16 साल की उम्र से उन्होने नाटक व कहानियाँ लिखना प्रारम्भ कर दिया था। उन्होने एक हजार कविता, आठ उपन्यास, 8 कहानी संग्रह व विभिन्न विषयो पर लिखा था। 

संगीत के प्रेमी थे रवीन्द्रनाथ टैगोर-

इन्होने अपने जीवन में 2000 से अधिक गीतो की रचना की थी। उनके द्वारा लिखा गए दो गीत आज भारत व बग्लादेश के राष्ट्रगीत हैं। 51 साल की उम्र में बेटे के साथ इंग्लैड जाते वक्त गीतांजलि का अनुवाद किया। गीतांजलि (What is Rabindranath Tagore's most famous poem) का अनुवाद अंग्रेजी में करने के पीछे उनकी कोई चाह नहीं थी। यात्रा के समय जिस नोटबुक में उन्होने अनुवाद किया वो नोटबुक व सूटकेस उनका बेटा वही जहाज में भूल गया।

जो अगले दिन किसी व्यक्ति ने रविन्द्रनाथ टैगोर को दिया। उनके दोस्त रोगेंस्टिन ने जब सुना कि रविन्द्रनाथ टैगौर ने गीतांजलि का अंग्रेजी में अनुवाद किया। तो उन्होने उसे पढ़ने की इच्छा जाहिर की तथा उसे पढ़ने के बाद वो मंत्र मुग्ध हो गए थे। उन्होने फिर अपने दोस्त डब्लू.बी.यीट्स को दिया जिसके बाद 1912 में इसकी कुछ प्रतिया इंडिया सोसाइटी के सहयोग से प्रकाशित हुई। और इस कृति ने इतिहास रच दिया। 

गीतांजलि के प्रकाशित होने के एक साल बाद 1913 में रविन्द्रनाथ टैगोर को नोबल (Why did Rabindranath Tagore get Nobel Prize) से सम्मानित किया गया। 

इनका संवाद रहा प्रसिद्ध-

गुरुदेव रबींद्रनाथ स्वामी विवेकानंद के बाद दूसरे ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने विश्व धर्म संसद को संबोधित किया। ऐसा उन्होंने दो बार किया था। उनका अल्बर्ट आइंस्टीन से  प्रकृति पर संवाद बहुत प्रसिद्ध रहा था। .

बापू को महात्मा की उपाधि -

गुरूदेव रबीन्दनाथ टैगोर ने ही महात्मा गाँधी को बापू की उपाधि दी थी। महात्मा गाँधी ने शांतिनिकेतन के लिए उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की थी। 

चित्रकारी में रूची-

इनको चित्रकारी में बहुत ही रूची थी। यही वजह हैं कि उनकी पेंटिंग्स की प्रदर्शनी पेरिस और यूरोप में कई जगह भी लगी थीं। 

Rabindranath Tagore Death Anniversary-

इनकी मृत्यु 7 अगस्त 1941 में यूरीमिया नामक बीमारी से हो गयी थी।

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