Rajiv Gandhi Death Anniversary 2022 ; राजीव गाँधी की पुण्यतिथि पर भावुक हुए राहुल गाँधी, जानिये राजीव गाँधी के मौत से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

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Rajiv Gandhi Death Anniversary; आज भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर देश भर में उन्हें याद किया जा रहा है। 21 मई 1991 को एक आत्मघाती बम धमाके में उनकी मृत्यु हो गयी थी। आज राहुल गाँधी अपने पिता राजीव गाँधी को याद करके भावुक हो गये। 

Rajiv Gandhi Death Anniversary 2022-

क्या कहा राहुल गाँधी ने राजीव गाँधी की पुण्यतिथि पर-

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने आज अपने पिता कि पूर्णतिथि पर लिखा कि- "My father was a visionary leader whose policies helped shape modern India. He was a compassionate & kind man, and a wonderful father to me and Priyanka, who taught us the value of forgiveness and empathy. I dearly miss him and fondly remember the time we spent together." (मेरे पिता एक दूरदर्शी नेता थे,जिनकी नीतियों ने आधुनिक भारत को आकार देने में मदद की थी। वो एक दयालु और उदार शख्सियत थे. वो मेरे और प्रियंका दोनों के लिए एक अद्भुत पिता थे, जिन्होंने हमें क्षमा और सहानुभूति का मूल्य सिखाया था, मुझे उनकी बहुत याद आती है)

इसके अलावा उन्होने ट्वीटर पर एक GIF भी शेयर किया, जिसमें भारत रत्न राजीव गाँधी से जुड़ी यादे कुछ यादें थी।

कैसे हुई थी Rajiv Gandhi की हत्या-

1991 को हुई इस घटना ने भारत सहित पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था। आपको बता दे कि लिट्टे (LTTE) उग्रवादियों ने श्रीलंका (Sri Lanka) में शांति सेना भेजने से नाराज होकर तमिल विद्रोहियों ने तमिलनाडु के श्रीपेरम्बदूर (Perambadur) में राजीव गांधी पर आत्मघाती हमला किया था। इस घटना को अंजाम देने के लिए एक बूढ़ी महिला का प्रयोग किया गया था।

  एक महिला फूलों का हार लेकर पहुंची थी उस समय राजीव गाँधी लोक सभा चुनाव के लिए प्रचार कर रहे थे। राजीव गांधी वो राजीव गाँधी के पास अपने शरीर में बम बाँधकर गयी। जिसके बाद वहाँ जोरो का बम धमाका हुआ और वहाँ मौजूद लोगो के चिथड़े उड़ गए। उसमें से एक भारत रत्न राजीव गाँधी भी थे। 

राजीव गाँधी (Rajiv Gandhi) की जीवन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य-

सबसे युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की हत्या 21 मई 1991 को एक आतंकी हमले में हुई थी। आपको बता दे कि उनकी हत्या के  पांच साल पहले ही अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने एक रिपोर्ट में उनपर हमला होने, हत्या की साजिश होने की आशंका जताई थी। लेकिन इसके बावजूद भी वो राजीव 1989 तक प्रधानमंत्री पद पर रहे थे।

राजीव गाँधी जब तीन साल के थे तब भारत आजाद हुआ था। वो मात्र 40 साल की उम्र में ही प्रधानमंत्री बने थे। उनको फोटो खीचने व विमान उड़ाने का शौख था। ये बात उनकी किताब 'राजीव्स वर्ल्ड- फोटोग्राफ्स बाय राजीव गांधी' से पता चलता हैं।

ऐसा कहा जाता है कि राजीव गांधी एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री थे, जो अपनी गाड़ी स्वंय चलाकर जगह-जगह जाते थे। इसके अलावा कई चुनावी रैलियों में भी राजीव गांधी खुद अपनी कार चलाकर पहुंचे थे। तथा उनके सुरक्षा गार्ड  उनके पीछे आते थे।

इंदिरा गाँधी की राजनीति विरासत को संजय गाँधी संभालते थे। लेकिन उनकी एक विमान दुर्घनटना में मृत्यु हो गयी थी। जिसके बाद एक दिन बद्रीनाथ धाम के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद जी ने इंदिरा गांधी से मिलने आये थे। उन्होने इंदिरा गाँधी को सावधान किया कि राजीव को अब ज्यादा समय तक विमान नहीं उड़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि  राजीव को अब राष्ट्र की सेवा में लग जाना चाहिए। जिसके बाद से ही राजीव राजनीति में सक्रिय हो गए थे। और यही से उनका राजनीति सफर शुरू हो गया था। 

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