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राम मंदिर का इतिहास तथा इससे जुडी घटनाओ की सम्पूर्ण जानकारी

हिन्दू धर्म के अनुसार श्री राम जी की जन्म अयोध्या में सतयुग में था। भगवान राम विष्णु भगवान के अवतार थे। अयोध्या में ही श्री राम जी का एक भव्य मन्दिर भी था। लेकिन जब भारत पर मुगल सम्राट बाबर ने आक्रमण किया था। तो उसने राम-मन्दिर को तुड़वाकर वहाँ पर बाबरी मस्जिद का निर्माण करा दिया था। जिसकी वजह से हिन्दू धर्म के लोगो तथा भगवान श्री राम को मामने वाले लोगो की आस्था को आघात पहुँचा था।​ अयोध्या राम मंदिर का इतिहास तथा इससे जुडी घटनाये।

लेकिन आज वर्षों बाद लोगो का संघर्ष और त्याग सफल हुआ। और दिनांक 5 अगस्त को अयोध्या में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा अयोध्या श्री राम-मन्दिर का भूमि-पूजन होने जा रहा हैं। इस कार्यक्रम की पूरी तैयारी अयोध्या में हो चुकी हैं। ना केवल भारत में ही दुनिया भर के देशों की नजर कल अयोध्या में हो रहे राम-मन्दिर के भूमि-पूजन पर रहेंगी। भारतवासियों के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण होगा।

क्या है, राम-मन्दिर से जुड़ा विवाद-

अयोध्या राम मंदिर का इतिहास तथा इससे जुडी घटनाये। अयोध्या भगवान श्री राम की नगरी जिसका उल्लेख पुराणो में भी देखने को मिलते हैं। लेकिन बताया जाता हैं, कि मुगल शासक बाबर जब भारत आया तो उसने भारत में स्थित मंदिरो को तुड़वाकर मस्जिद बनाना चाहता था। वो हिन्दु धर्म का आस्तित्व मीटा देना चाहता था। जिसका सबूत अयोध्या में रामजन्म भूमि की जगह बाबरी मस्जिद का निर्माण हैं। 

कब बाबर ने बनवाया था बाबरी मस्जिद -

मुगल शासन की भारत में स्थापना करने वाले बाबर ने अयोध्या में स्थित राम-मन्दिर को जहाँ पर भगवान श्री राम की जन्म स्थली थी। वहाँ पर मुख्य मन्दिर को तुड़वाकर मस्जिद बनवा दिया था। और उस मस्जिद का नाम बाबरी मस्जिद रखा था।

कब हुआ था पहली बार राम-मन्दिर को लेकर विवाद -

रामजन्म भूमि को लेकर सबसे पहले विवाद हिन्दु और मुस्लिम समुदाय के बीच 1853 में हुआ था। उस समय भारत में अंग्रेजो का शासन था।

कब मिला था हिन्दुओं पूजा करने का अधिकार​ -

राम-मन्दिर को लेकर हिन्दुओ और मुस्लिम समुदायों में विवाद को देखते हुए अंग्रेजी शासन ने हिन्दुओं तथा मुस्लिमों में हो रहे विवाद को शान्त करने के लिए 1859 में हिन्दुओ  को बाहर का हिस्सा तथा मुस्लिमों को अन्दर का हिस्सा पूजा करने को दे दिया था। लेकिन उसके बाद और विवाद बढ़ता गया। जिसको मद्दे नजर रखते हुए मंदिर में ताला लगा दिया गया।

ये मामला कोर्ट में पहुचं गया कोर्ट में फैसला हिन्दुओं के पक्ष में आया तथा एक बार फिर से 1986 में हिन्दुओं को पूजा करने का अधिकार दे दिया। जिसके कारण मुस्लिम समुदाय में आक्रोश की लहर आ गयी हैं। और उन्होंने भी बाबरी मस्जिद कमेटी का गठन किया।

कब गिराया गया था बाबरी मस्जिद-

6 दिसम्बर 1992 को बाबरी मस्जिद का ढ़ाचाँ गिराया। तथा उस समय बहुत भीषड़ दंगा हुआ। जिसमें कम से कम 2000 लोगो की जान गयी थी। जिसके बाद काफी दंगे हुए थे। बताया जाता हैं कि, जिसकी वजह से पाकिस्तान में भी काफी मंदिरों को गिराने की बात सामने आयी था। अयोध्या राम मंदिर का इतिहास तथा इससे जुडी घटनाये।

कबतक चला कोर्ट में इसपर केस -

  1. बाबरी-मस्जिद और राम मन्दिर विवाद में मुस्लिम समुदाय द्वारा 1993 में लिब्रहान आयोग का गठन किया गया। इस केस में 1993 में मोहम्मद इस्माइल फारूकी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका रद्द् कर दी।
  2. उसके बाद 1997 में हाईकोर्ट में अपील की गयी। हाईकोर्ट ने भी याचिका रद्द् कर दी।
  3. उसके बाद असलम भूरे द्वारा 2002 में एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गयी।
  4. जिसके बाद 2010 में लखनऊ खंडपीठ ने विवादित भूमि को रामजन्म भूमि घोषित किया। जिस पर मुस्लिम समुदाय ने आपत्ति जतायी।
  5. हाईकोर्ट द्वारा 2017 में ये फैसला लिया गया। कि इस विवाद में सुनवाई प्रतिदिन की जायेगी।
  6. शिया वक्फ बोर्ड ने न्यायालय में याचिका दायर करके खुद का  अधिकार होने का दावा किया। जिसके बाद लगातार विवाद चलता गया मामला सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर से पहुँच गया।

कब पूर्ण रूप से राम-मन्दिर बनाने का आदेश दिया गया -

9 नंबम्बर 2019 को सुबह 10.30 पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ रंजन गोगोई, जस्टिस शरद अरविंद बोबडें जसिट धनंजय, जस्टिस यशवंत चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुला नजीर  पाँच जजों की बेंच ने विवादित जमीन पर रामलला को पूर्ण रूप से हक बताते हुए केन्द्र सरकार को तीन महीने के अन्दर ट्रस्ट बनाने को कहा। तथा बताय कि इस ट्रस्ट के पास राम-मन्दिर का पूरा कार्यभार होगा। तथा मुस्लिम पक्ष की बात को सुनते हुए उन्हे उनकी पसन्द के अनुसार अयोध्या में किसी भी जगह पर 5 एकड़ जमीन मस्जिद बनाने का आदेश दिया। जहाँ पर मस्जिद का निर्माण होगा।

5  अगस्त 2020 वो दिन आ ही गया जब 500 वर्षों का सघर्ष सफल हुआ। तथा रामलल्ला के मन्दिर का भूमि-पूजन का दिन आ गया।  

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