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रूस की कोरोना वैक्सीन पर उठे सवाल

डब्लूएचओ ने कहा हैं, कि रूस ने कोरोना की वैक्सीन बनाने में सही से निर्देशो का पालन नहीं किया। जिसकी वजह से लोगो को इससे खतरा भी हो सकता हैं। रूस द्वारा बनाये गये वैक्सीन पर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं, क्योकि रूस ने 42 दिन के अन्दर ही सारे ट्रॉयल पूरे कर लिये हैं। जबकि इतनी जल्दी किसी वैक्सीन का ट्रॉयल पूरा नहीं हो सकता हैं। तथा ट्रॉयल के दौरान जिन लोगो पर इस वैक्सीन का प्रयोग किया गया। उनके अन्दर साइड देखने को मिले हैं।

रूस का वैक्सीन पर दावा -

रूस का कहना है की उसकी वैक्सीन कोरोना के खिलाफ इम्युनिटी बढ़ने में काफी हद तक कारगर है। रूस ने यह दावा भी किया है की ट्रायल के दौरान जितने भी लोगो को वैक्सीन का डोज दिया गया उनमे कोरोना के खिलाफ एंटीबाडीज का स्टार काफी बढ़ा। यहाँ तक की रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन का कहना है की यह वैक्सीन उनकी बेटी को भी दी गयी। और उसमे एंटीबाडीज की मात्रा में काफी इजाफा हुआ।

रूस द्वारा कोरोना की वैक्सीन को लेकर क्यों उठे सवाल -

कोरोना महामारी की वैक्सीन बनाने के लिए कई देश लगातार शोध कर रहे हैं। तथा कोरोना की कई वैक्सीनो पर काम भी चल रहा हैं। जिनमें कई वैक्सीन तो ऐसी हैं। जो ह्यूमन ट्रॉयल की अन्तिम फेज में हैं। रसिया का कोरोना की वैक्सीन बनाने का अचानक दावा करना लोगो के मन में आशंका ले आया हैं। रसिया ने अपनी कोरोना वैक्सीन के दावे में जितने भी तथ्य डब्लूएचओ के सामने प्रस्तुत किये हैं। वो इस वैक्सीन को सुरक्षित तथा उपयोगी नहीं साबित करता।

रूस की कोरोना वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स –

रूस के द्वारा बनाई गयी इस वैक्सीन के कई साइड इफेक्ट्स भी देखने को मिले है।  ट्रायल के दौराल जिन वोलेंटियर्स को इसके डोज दिए गए उनमे से कई लोगो में ये साइड इफेक्ट्स दिखे। जैसे शरीर के तापमान का बढ़ना, वैक्सीन लगने वाली जगह पर सूजन, खुजली, सर में दर्द, डायरिया, गले में इरिटेशन और अन्य प्रभाव दिखे। वही रूस के राट्रपति की पुत्री को जब यह वैक्सीन दी गयी तो उसके शरीर का तापमान पहला डोज देने पर बढ़ा पर पर दूसरे डोज पर घट गया। पर दावा ये किया गया है। की वैक्सीन देने से उनके शरीर में एंटीबाडीज की मात्रा में काफी इजाफा हुआ।

क्यों WHO को रूस की वैक्सीन पर नहीं है भरोसा -

WHO का कहना है की रूस ने वैक्सीन का निर्माण करते वक्त तय दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया। साथ ही WHO का यह भी कहना है की रूस ने सही तरह से ट्रायल की प्रक्रिया को संपन्न नहीं किया। उनका कहना है की कोरोना जैसी महामारी की वैक्सीन जल्द आना बहुत जरूरी है। पर वैक्सीन बनाने के लिए जो भी दिशा निर्देश है उनकी अनदेखी नहीं हो सकती। WHO का कहना है की वैक्सीन से एंटीबाडीज की मात्रा औसत से भी कम बढ़ रही है।

WHO को नहीं थी रूस की कोरोना वैक्सीन की जानकारी -

WHO ने रूस की वैक्सीन के बारे में कोई विशेष जानकारी न होने की भी बात कही। WHO ने बताया की रूस की कोरोना वैक्सीन के ट्रायल तथा प्रयोग से संबधित दस्तावेज हमारे पास नहीं है। उनका कहना की रूस ने वैक्सीन से रिलेटेड जो भी दस्तावेज हमे दिए है उनसे इसकी प्रमाणिकता सिद्ध नहीं होती है। WHO को वैक्सीन के थर्ड फेज के ट्रायल पर भी संदेह है।

रूसी सरकार तथा वैक्सीन बनाने वाली कंपनी के अलग अलग दावे –

वही वैक्सीन बनाने वाली कंपनी तथा रसियन सरकार का वैक्सीन को लेकर अलग अलग दावा करना भी संदेह को बढाता है। रूसी सरकार ने अपने बयान में कहा की इस वैक्सीन के कोई साइड इफेक्ट्स नहीं है जबकि वैक्सीन बनाने वाली कंपनी ने बुखार आने की बात कही। पर कहा की उसे नार्मल दवाओं से सही किया जा सकता है। 

जबकि शोध के दौरान ये पाया गया की वैक्सीन के कई साइड इफेक्ट्स है। इस वैक्सीन का ट्रायल भी मात्रा 38 लोगो पर 42 दिनों तक किया गया है। जिसपे वैक्सीन बनाने वाली कंपनी का कहना है की इतने कम लोगो पर ट्रायल होने के कारण हम इससे होने वाले साइड इफ़ेक्ट पर कुछ कह नहीं सकते। ट्रायल में शामिल लोगो में 31 लोगो में 42 दिन बाद भी साइड इफेक्ट्स देखने को मिले।    

इस सब बातो को देखते हुए यही कहा जा सकता है की रूस की कोरोना वैक्सीन बना लेने के दावे में अभी काफी चीजे पुख्ता नहीं है।

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