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Rudrabhishek Pooja Vidhi; सावन में घर पर ऐसे करे रूद्राभिषेक दूर होगी आपकी सारी समस्या, जानिए रूद्राभिषेक पूजा विधि व इसके पीछे की पौराणिक कथा

Rudrabhishek Vidhi / Rudrabhishek Puja Vidhi/ Rudrabhishek Mantra/ Rudrabhishek at home/ Rudrabhishek Puja Samagri/ Rudhrabhishek Pooja/ सावन का पावन महीना शुरू होने वाला हैं और घर-घर में व मंदिरो में भगवान रूद्र का अभिषेक उनके भक्तो द्वारा किया जाएगा। रूद्राभिषेक सावन के महीने में कराना काफी फलदायक होता हैं। इसके पीछे हैं एक पौराणिक कथा

Rudrabhishek Puja Vidhi at Home (रूद्राभिषेक कैसे करे) - 

घर पर कैसे करे रूद्राभिषेक; ऐसा कहा जाता हैं, कि सावन के महीने में ही भगवान शिव व माता पार्वती का मिलन हुआ था। इसलिए ये महीना भगवान शिव को अत्यधिक प्रिय हैं। और इस महीने में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनके भक्तो द्वारा घर-घर पर व मंदिरो में उनका अभिषेक कराया जाता हैं। जिसे हम रूद्राभिषेक कहते हैं। जानिए आप कैसे अपने घर पर रूद्राभिषेक कर सकते हैं। सभी प्रकार के कष्टो को दूर करने व भगवान शिव को प्रसन्न (रूद्राभिषेक का लाभ) के लिए रूद्राभिषेक किया जाता हैं।

Rudrabhishek Vidhi at Home -

इसके लिए आप घर पर स्नानादि करके भगवान शिव का मिट्टी का शिवलिंग बनाये, यदि आसन पारद हुआ तो और भी अच्छा होगा। सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करे। फिर माता पार्वती, भगवान गणेश, नौ ग्रह, माता लक्ष्मी, सूर्यदेव, अग्निदेव, ब्रह्मदेव, पृथ्वी माता और गंगा माता को पूजा में शामिल करें। इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती, नन्दी और नवग्रहों के लिए आसन बनाए तथा उन्हें फूल, फल आदि चढ़ाए व रूद्राभिषेक मंत्र का उच्चारण करे। 

रूद्राभिषेक सामग्री लिस्ट (Rudrabhishek Samagri)- 

  • बिल्व पत्र
  • रुद्राक्ष, भस्म
  • कपूर, रुई, दीपक, तेल
  • केसर,चंदन, कुमकुम, रोली
  • यज्ञोपवीत , नाला (मौली)
  • अक्षत (चावल)
  • अबीर व गुलाल
  • सुपारी, पान के पत्ते
  • फूल, फूलों की माला
  • धतूरा, भांग
  • कनैल फूल
  • धूप - अगरबत्ती
  • गंगाजल (शुद्ध जल)
  • पंच मेवा, मिठाई आदि।
  • पंचामृत (दूध दही घी शक्कर शहद)
  • नैवेद्य, फल, केले आदि।
  • इलायची (छोटी), लौंग।
  • इत्र की शीशी
  • भगवान के लिए वस्त्र व उपवस्त्र
  • गणेश जी के लिए वस्त्र 
  • फूल (गुलाब, गेंदा, संतराज आदि)
  • गणेश जी के लिए दूर्वा आदि
  • अर्घ्य पात्र सहित अन्य पंचपात्र लोटा
  • आदि
  • रूद्राभिषेक मंत्र- 

    वैसे तो रुद्राभिषेक मंत्र शुक्लयजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी के कुल दस अध्याय हैं, जिनका पाठ रुद्राभिषेक के समय किया जाता है। लेकिन इनमें मुख्य आठों (नमक-चमक का पाठ) अध्यायों में दिए गए मन्त्रों से ही रूद्राभिषेक किया जाता है लेकिन आवश्यकता होने पर और यदि आप स्वयं ही आसान विधि से रुद्राभिषेक करना चाहें तो निम्लिखिन रुद्राभिषेक मंत्र से आप भगवान शिव का अभिषेक कर सकते हैं। (Rudrabhishek Mantra) 

    ॐ नम: शम्भवाय च मयोभवाय च नम: शंकराय च
    मयस्कराय च नम: शिवाय च शिवतराय च ॥
    ईशानः सर्वविद्यानामीश्व रः सर्वभूतानां ब्रह्माधिपतिर्ब्रह्मणोऽधिपति
    ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदाशिवोय्‌ ॥
    तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
    अघोरेभ्योथघोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यः सर्वेभ्यः सर्व सर्वेभ्यो नमस्ते अस्तु रुद्ररुपेभ्यः ॥
    वामदेवाय नमो ज्येष्ठारय नमः श्रेष्ठारय नमो
    रुद्राय नमः कालाय नम: कलविकरणाय नमो बलविकरणाय नमः
    बलाय नमो बलप्रमथनाथाय नमः सर्वभूतदमनाय नमो मनोन्मनाय नमः ॥
    सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः ।
    भवे भवे नाति भवे भवस्व मां भवोद्‌भवाय नमः ॥
    नम: सायं नम: प्रातर्नमो रात्र्या नमो दिवा ।
    भवाय च शर्वाय चाभाभ्यामकरं नम: ॥
    यस्य नि:श्र्वसितं वेदा यो वेदेभ्योsखिलं जगत् ।
    निर्ममे तमहं वन्दे विद्यातीर्थ महेश्वरम् ॥
    त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिबर्धनम् उर्वारूकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात् ॥
    सर्वो वै रुद्रास्तस्मै रुद्राय नमो अस्तु । पुरुषो वै रुद्र: सन्महो नमो नम: ॥
    विश्वा भूतं भुवनं चित्रं बहुधा जातं जायामानं च यत् । सर्वो ह्येष रुद्रस्तस्मै रुद्राय नमो अस्तु ॥

    भगवान शिव का अभिषेक यानि रूद्राभिषेक करने के लिए इन मंत्रो का भी प्रयोग किया जाता हैं, Rudrabhishek Mantra- रुद्रहृदयोपनिषद् में यह रूद्र मंत्र (रूद्राभिषेक मंत्र)-

    सर्वदेवात्मको रुद्र: सर्वे देवा: शिवात्मका:।
    रुद्रात्प्रवर्तते बीजं बीजयोनिर्जनार्दन:।।
    यो रुद्र: स स्वयं ब्रह्मा यो ब्रह्मा स हुताशन:।
    ब्रह्मविष्णुमयो रुद्र अग्नीषोमात्मकं जगत्।।

    वायुपुराण में भगवान रूद्र का मंत्र (रूद्राभिषेक मंत्र)- 

    यश्च सागरपर्यन्तां सशैलवनकाननाम्।
    सर्वान्नात्मगुणोपेतां सुवृक्षजलशोभिताम्।।
    दद्यात् कांचनसंयुक्तां भूमिं चौषधिसंयुताम्।
    तस्मादप्यधिकं तस्य सकृद्रुद्रजपाद्भवेत्।।
    यश्च रुद्रांजपेन्नित्यं ध्यायमानो महेश्वरम्।
    स तेनैव च देहेन रुद्र: संजायते ध्रुवम्।।

    रूद्राभिषेक क्यो किया जाता हैं महत्व-

    पौथाणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु की नाभि से उत्तपन्न कमल से ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई हैं। ब्रह्मा जी जब भगवान विष्णु के पास अपने जन्म का कारण पूछने गए, तो उन्होने उनकी उत्पत्ति का रहस्य बताया, इसके साथ ही यह भी बताया  उनके कारण ही आपकी भी उत्पत्ति हुई हैं। लेकिन भगवान विष्णु की इस बात को मानने के लिए ब्रह्मा जी तैयार ही नहीं हुए। दोनो में भयकर युद्ध होने लगा। इस युद्ध से नाराज भगवान रूद्र लिंग रूप में प्रकट हुए। 

    इस लिंग का आदि और अन्त जब ब्रह्मा और विष्णु जी को कही पता नहीं चल सका, तो उन्होने हार मान ली और फिर लिंग का अभिषेक किया। जिससे भगवान शिव बहुत ही प्रसन्न हो गए। यही से शुरू हुआ रूद्राभिषेक (Rudrabhishek Katha in Hindi)

    रूद्राभिषेक कब करे- 

     आप रूद्राभिषेक सावन  के सोमवार, प्रदोष व्रत और शिवरात्रि पर बिना विचार कर सकते हैं। हर महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया और नवमी, कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा और अष्टमी और अमावस्या, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी और एकादशी, शुक्ल पक्ष की पंचमी और द्वादशी तिथि, कृष्ण पक्ष की पंचमी और द्वादशी, शुक्ल पक्ष की षष्ठी और त्रयोदशी तिथि को रुद्राभिषेक 

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