Taiwan vs China News: जानिए यदि ताइवान व चीन में युद्ध हुआ तो किसकी होगी जीत

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Taiwan vs China war/ Taiwan Weapons vs China/ Taiwan Vs China News/ China Vs Taiwan Breaking News/ चीन ताइवान विवाद के बीच नैंसी पेलोसी के साउथ कोरिया दौरे पर सस्पेंस बना हुआ हैं। इस समय सबके मन में यही सवाल हैं, यदि चीन व ताइवान (China Vs Taiwan war) का युद्ध हुआ तो किसकी होगी जीत।

Taiwan vs China war Update-

चीन ने सभी इंटरनैशनल एयरलाइंस को ताइवान के एयर स्पेस का इस्तेमाल नहीं करने की चेतावनी दी है। इसी बीच नैंसी पेलोसी के साउथ कोरिया दौरे पर सस्पेंस बना हुआ हैं। आपको बता दे कि दोपहर 2.30 बजे साउथ कोरिया के लिए रवाना हुई हैं। नैंसी पेलोसी का विमान अब ताइवान के तोपेस से उड़ भी पाएगा या नहीं इसपर भी सवाल बना हुआ हैं। 

चीन व ताइवान में कौन ज्यादा ताकतवार(China Vs Taiwan War) -

ताइवान व चीन में यदि युद्ध हुआ भी तो किसकी होगी जीत, आपको बता दे कि ताइवान भले ही चीन से छोटा हो लेकिन हथियार के मामले में ताइवान-चीन से पीछे नहीं हैं। चीन की नौसेना, थल सेना और वायु सेना को टक्कर देने के लिए 12 जंगी जल पोत बनाए गये हैं। जिनमें से एक तुओ चियांग कॉर्वेट (Tuo Chiang Corvette) हैं।

ताइवान के पास मौजूद हथियार-

Taiwan Weapons: हीसंग फेंग 3 (Hsiung Feng III) जिसका अर्थ हैं, ब्रेव विंड, यह एक मीडियम रेंज सुपरसोनिक मिसाइल हैं। यह जमीन व नौसैनिक दोनो टारगेट पर हमला करती हैं। ताइवान के पास ऐसे 250 मिसाइले मौजूद हैं। 

स्काई बो 3 (Sky Bow III) जिसे तियेन कुंग के नाम से जाना जाता हैं। ये इतनी खतरनाक मिसाइल हैं, कि इससे बचने का दुश्मन के पास समय भी नहीं होता हैं। 

एफ-16 फाइटिंग फॉल्कन (F-16 Fighting Falcon) इसे अमेरिका ने बनाया हैं। ये मिसाइल इस समय 48 देशो के पास मौजूद हैं। 

  • एम-9 साइडविंडर (AIM-9 Sidewinder) 
  • रिम-7 सी स्पैरो (RIM-7 Sea Sparrow) 
  • MIM-72 चपारल (MIM-72 Chaparral) 
  • स्काई स्वॉर्ड 2 (Sky Sword-II) 
  • हेलफायर एजीएम मिसाइल (AGM-114 Hellfire) 
  • M142 हिमार्स आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (M142 HIMARS) 
  • M109 पैलेडिन हॉवित्जर (M109 Paladin Self Propelled Howitzer) 
  • एम1 अबराम टैंक्स (M1 Abrams Tanks)

यदि चीन व ताइवान के बीच युद्ध हुआ तो युद्ध काफी लम्बा चलेगा। और इससे ज्यादा नुकसान चीन को ही होगा, क्योकि किसी भी युद्ध में अत्यधिक आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा आर्थिक, अंतरराष्ट्रीय, आस-पड़ोस के रिश्तों के साथ-साथ कई मोर्चों पर समझौते करना पड़ेगा। 

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