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Sardar Udham Singh (सरदार उधम सिंह) ने कैसे लिया था 21 साल बाद जालियावाला बाग हत्याकांड का बदला

Udham Singh/ Udham Singh Death Anniversary 2022/ udham singh shaheedi diwas/ उधम सिंह पुर्णतिथि/ महान क्रांतिकारी ऊधम सिंह जिनका स्वभाव देखकर ही उनके माता-पिता ने उनका नाम बचपन में ही शेर सिंह रख दिया था। जिस शेर सिंह ने 21 साल बाद जालियांवाला बाग हत्याकांड का बदला अंग्रेजो से लिया था। 

Udham Singh Biography (उधम सिंह की जीवनी)-

भारत के महान क्रांतिकारी ऊधम सिंह जी का जन्म 26 दिसंबर 1899 में पंजाब के संगरूर जिले में स्थित गाँव सुनाम में हुआ था। बचपन से ही ऊधम सिंह का स्वभाव बहादुरी भरा था। यहि वजह थी कि उनके माता-पिता ने उनका नाम शेर सिंह रखा था।

ऊधम सिंह जी के माता-पिता का नाम चूहड़राम जाटव व नारायणी देवी था। ऊधम सिंह का बचपन बहुत मुश्किलो से गिरा हुआ था। ऊधम सिंह के माता-पिता मूलरूप से उत्तर प्रदेश के एटा जिले के रहने वाले थे। लेकिन 1857 के बाद जीवन-यापन के लिए उनके दादा संग वो पंजाब के संगरूर जिला पटियालाी गाँव सुनाम में आकर बस गए।  

इनके माता-पिता ने गुरूद्वारे में अमृत चखा व सिख धर्म को अपना लिया था। जिसके बाद इनके पिता का नाम टहल सिंह व माता का नाम नारायणी कौर हो गया। हालाकि ऊधम सिंह जी ने अपना नाम आगे चलकर राम मोहम्मद सिंह आजाद रखा। जिसका साफ मतलब हैं कि वो  जाति व धर्म से ऊपर थे।

बहुत कम उम्र में ही माता-पिता का साया उनके सर से उठ गया था। जिसके बाद शेर सिंह व उनके भाई साधु सिंह को 24 अक्टूबर, 1907 को अमृतसर में केंद्रीय खालसा अनाथालय में पुतलीघर में भर्ती करवा दिया गया था। 1913 में ऊधम सिंह ने अपने भाई साधु सिंह को निमोनिया की वजह से खो दिया। 

पं जयचंद्र शर्मा के सान्निध्य की वजह से उन्हें देशभक्ति के संस्कार भी मिले थे। सन् 1857 की क्रांति के बारे में उन्हें पता चला। जिसके बाद क्रांतिकारियों का जीवन-चरित्र उन्हें विशेष रूप से प्रेरित करता था। लेकिन अमर शहीद मदनलाल ढींकरा से वो काफी प्रेरित हुए। उधम सिंह ग़दर पार्टी और HSRA से संबंधित एक भारतीय क्रांतिकारी थे

 उधम सिंह ने दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे, ब्राजील और अमेरिका की यात्रा पैसा इकट्ठा करने के लिए भी की थी। भगत सिंह के कहने के बाद वे 1927 में भारत लौट आए। अपने साथ वे 25 साथी, कई रिवॉल्वर और गोला-बारूद भी लाए थे। अमेरिका और कनाडा में रह रहे भारतीयों ने 1913 में इस पार्टी को भारत में क्रांति भड़काने के लिए बनाया था

जालियांवाला बाग हत्याकांड का लिया 21 साल बाद बदला-

इतिहास के पन्नो में ऐसा लिखा हैं, कि जब जालियांवाला बाग हत्याकांड हुआ व जनरल डायर ने निहत्थे व बेकसूर लोगो पर गोलियाँ बरसा दी थी। तब ऊधम सिंह वहीं मौजूद थे। उन्होने ये पूरी घटना अपनी आँखो से देखा था। और उन्होने लोगो को अस्पताल पहुँचाने में मद्द की थी। इस घटना ने उनके दिमाग पर गहरा छाप छोड़ दिया था। 

जिसके चलते उन्होने साल 1919 जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लेने के लिए पंजाब के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ'डायर को लंदन में सबके सामने गोली मार दी थी। जिसने जालियांवाला बाग में हुए नरसंहार के लिए आर्डर दिया था। ब्रिटेन में ही उन्होने कर्जन वायरी की भी हत्या की थी। 

13 मार्च 1940 को ऊधम सिंह कैंथस्चन हॉल में एक मीटिंग में पहुंचे थे। मीटिंग खत्म होने को थी तभी ऊधम सिंह ने स्टेज की तरफ गोलियां चलाई थी। वो जलियांवाला बाग कांड के वक्त पंजाब के गवर्नर रहे माइकल ओ' ड्वायर और सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंडियन अफेयर्स लॉरेंस को मारना चाहते थे। 

इस कार्य को अंजान देने के बाद ऊधम सिंह पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें हत्या का दोषी ठहराया गया और 31 जुलाई 1940 (Udham Singh Death Anniversary) में उन्हें फांसी दे दी गई। 

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