संस्थानो द्वारा शिक्षको के दस्तावेज ना लौटने पर हो सकती हैं, संस्थानो पर कार्यवाही

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Credit JagRuk Hindustan

यूजीसी ने शिक्षको के प्रमाण पत्रो तथा दस्तावेजो को संस्थानो द्वारा वापस ना करने पर संस्थानो पर उचित कार्यवाही करने को कहा हैं। संस्थानो द्वारा शिक्षकों की सर्टिफिकेट जमा कर लिये जाने के बाद वापस नहीं किया जाता हैं। जिसकी वजह से उनको दूसरी नौकरी तलाशने में काफी दिक्कतो का सामना करना पड़ता हैं। जिसकी वजह से यूजीसी संस्थानों से काफी नाराज हैं। UGC का कहना है की शिक्षण संस्थानों को शिक्षकों के दस्तावेज लौटने पड़ेंगे।

क्या हैं, पूरा मामला -

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) ने नया आदेश जारी किया हैं, उनका कहना हैं, कि अगर कोई भी संस्थान शिक्षको के ओरिजनल सर्टिफिकेट जमा कर लेगा या वापस नहीं करेगा तो उस संस्थान के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी। शिक्षक जब किसी संस्थान में पढ़ाते हैं, तो इन्टरव्यू के दौरान उनके असली दस्तावेज जमा कर लिये जाते हैं। जिसकी वजह से शिक्षक अगर नौकरी छोड़ना चाहते हैं तो वो नौकरी नहीं छोड़ पाते हैं। क्योकि उनके दस्तावेज संस्थान के पास जमा होते हैं। जिसकी वजह से उनके हाथ से काफी बार अच्छे मौके चले जाते हैं। शिक्षण संस्थानों को शिक्षकों के दस्तावेज लौटने पड़ेंगे।

क्या कहना हैं, यूजीसी का -

संस्थानो द्वारा शिक्षको के असली सर्टिफिकेट जमा कर लेने तथा वापस ना करने की वजह से यूजीसी काफी नाराज हैं, जिसकी वजह से यूजीसी के सचिव प्रो. रजनीश जैन ने कहा कि उन्होने सभी राज्यों के विश्वविद्यालयो तथा संस्थानो को पत्र लिखकर भेजा हैं। उस पत्र में लिखा गया हैं, कि यूजीसी को यह जानकारी मिली हैं, कि संस्थानो द्वारा शिक्षको के शैक्षिक प्रमाण पत्र तथा ओरिजनल दस्तावेज जमा कर लिये जाते हैं, तथा शिक्षको के नौकरी छोड़ देने के बाद भी उनको उनके सर्टिफिकेट नहीं दिये जाते हैं। 

जिससे शिक्षको को नई नौकरी तलाशने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता हैं। जिसके चलते यूजीसी ने कहा है, कि संस्थानो को शिक्षको के ओरिजनल सर्टिफिकेट नहीं जमा करना चाहिए। इन्टरव्यू के दौरान उनके ओरिजनल सर्टिफिकेट देखने के बाद उनकी फोटोकॉपी भले जमा कर ले। लेकिन ओरिजनल सर्टिफिकेट ना जमा करे। यदि उन्होने शिक्षको के ओरिजनल सर्टिफिकेट जमा कर लिये और वापस नहीं दिये तो उस संस्थान के खिलाफ सख्त रूख अपनाया जायेगा।

संस्थानो को ये भी आदेश दिये गये हैं, कि यदि कोई भी नियुक्ति आती हैं, तो उनको दस्तावेजो के बारे में सही जानकारी देना अनिवार्य होगा।

क्या कहना हैं, शिक्षको-

संस्थानो द्वारा शिक्षको के मूल दस्तावेजो को जमा कर लेने की वजह से उन्हें नयी नौकरी तलाशने में काफी परेशानी होती हैं। क्योकि हर जगह असली दस्तावेज मागे जाते हैं, जिसकी वजह से उनको नौकरी नहीं मिल पाती हैं। कभी-कभी तो कोई-कोई संस्थान नौकरी से निकालने के बाद भी दस्तावेज नहीं देते हैं। शिक्षको का ये भी कहना हैं, कि इसमें सबसे ज्यादा परेशानी कांट्रेक्ट पर काम कर रहे शिक्षकों को झेलनी पड़ती हैं। क्योकि कभी उनको दूसरी जगह अच्छी पेमेन्ट मिलने के बाद भी वो सिर्फ इसलिए नौकरी नहीं ज्वाइंन  कर पाते हैं, क्योकि उनके पास मूल दस्तावेज नहीं होते हैं। और मांगने पर संस्थान उन्हें देने से मना कर देता हैं।

यूजीसी द्वारा संस्थानो को दिये गये इन आदेशो से शिक्षक काफी खुश हैं, अब उनको इन-प्रकार की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। तथा संस्थान भी अब शिक्षको पर मनमानी नहीं चला सकेंगे। शिक्षण संस्थानों को शिक्षकों के दस्तावेज लौटने पड़ेंगे।

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