विकास दुबे एनकाउंटर – योगी सरकार के लिए 2022 जीतना नहीं होगा आसान

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विकास दुबे एनकाउंटर पर उठे सवाल, यूपी चुनावो में बन सकते है योगी सरकार के लिए परेशानी का कारण
Credit JagRuk Hindustan

विकास दुबे एनकाउंटर केस के मामले में उठ रहे है योगी सरकार पर सवाल। प्रदेश के एक बड़े तबके का मानना है की यह एनकाउंटर नहीं है। बल्कि कई नेताओ और अधिकारीयों को बचाने के लिए की गयी हत्या है । कई पुलिस विशेषज्ञयो तथा विपक्ष के नेताओ ने योगी सरकार के इस कदम को गैर लोकतांत्रिक बताया। उनका मानना है की विकास दुबे को सजा कानून के दायरे में रह कर देनी चाहिए थी। ऐसे में राजनीती के गलियारों में यह खब​​​​र भी आग की तरह फ़ैल रही है! क्या विकास दुबे की कहानी, योगी सरकार के लिए ​2022 के चुनावो में मुश्किल का ​कारण बनेगी। 

​सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई सीबीआई जाँच की याचिका  -

जैसा की आप जानते है, 2 जुलाई की रात को कानपुर में हुए पुलिस हत्याकांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे का एनकाउंटर हो गया। परन्तु विकास दुबे की इस कहानी की पटकथा आज भी लिखी जा रही है। समय के साथ एस. आई. टी. की जाँच में काफी सारे रहस्य सामने आ रहे है। पहले ही इस मामले में सत्ता धारी दल तथा विपक्ष के कई नेताओ व अधिकारीयों की भूमिका पर सवाल उठ चुके है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका जिसमे इस मामले की सी. बी. आई.  जाँच की मांग उठी है। उस पर आज सुनवाई हुई । जिस पर जजों की एक बेंच ने विचार करने के लिए गुरुवार तक का समय माँगा है। 

​विकास दुबे एनकाउंटर में पुलिस की कहानी पर उठे सवाल -

वही ​पुलिस द्वारा बताई गई कहानी पर उठ रहे सवाल तथा लोगो के मन में एनकाउंटर को लेकर जो संदेह है। अब वो राजनीतिक हवा पकड़ रहा है। एनकाउंटर की एक रात पहले ही अचानक से लगे 55 घंटो के लॉकडाउन पर भी लोगो के मन में संदेह है । वही कई लोग एस. आई. टी. के गठन को योगी सरकार का एक दिखावा बता रहे है । कई  वरिष्ठ रिटायर पुलिस अधिकारिओ का भी यही मानना है। की पुलिस बदला लेने के लिए नहीं बल्कि कानून व्यवस्था को स्थापित करने के लिए है। इस तरह एनकाउंटर करने से पुलिस के प्रति लोगो के मन में भय आ सकता है।  जिसका समाज में गलत सन्देश जायेगा। 

​सोशल मीडिया पर लोगो ने योगी सरकार को बताया ब्राह्मण विरोधी -

प्रदेश के एक बड़े तबके का मानना है की योगी सरकार ब्राह्मणो को निशाना बना रही है। जिसकी एक झलक सोशल मीडिया पर भी दिख रही है। विकास दुबे के एनकाउंटर के पश्चात सोशल मीडिया दो हिस्सों में बट गया। तथा कई ब्राह्मणवादी संस्थाओ ने प्रदेश में ब्राह्मणो के खिलाफ हो रही आपराधिक घटनाओ तथा उनकी हत्या को भी इससे जोड़ दिया। उनका कहना है की  योगी सरकार ठाकुरवाद की ​धारणा को बढ़ावा दे रही है। कांग्रेस पार्टी के ब्राम्हण चेहरा मने जाने वाले जीतीन प्रसाद तथा पप्पू यादव के बयानों ने इस मामले को जातिवादी रूप दे दिया।

​विकास दुबे एनकाउंटर में जातिवादी मोड़  -

​सोशल मीडिया में दिख रहे आक्रोश को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है। की उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणो के मन में योगी सरकार के प्रति एक असन्तुस्टि आ गयी है।  जिसका प्रभाव आगामी विधानसभा चुनावो को देखने को मिल सकता है। कई सोशल मीडिया हैंडल्स ने तो यह तक लिखा की विकास दुबे की हत्या ब्राह्मण समाज की योगी सरकार पर विश्वास की हत्या है । तथा तात्कालिक रूप से लगाए गए लॉकडाउन  पर लोगो का यह कहना की यह योगी सरकार की चाल है ताकि लोग इस मामले पर चर्चा न कर सके। जब इसकी भनक योगी सरकार तक पहुंची तब सरकार ने आनन फानन में यह घोषणा कर दी। की अबसे हर सप्ताह के अंत में दो दिन की बंदी रहेगी। व इस लॉक​डाउन का कारण कोरोना को बताया।

​विपक्ष ने किया योगी सरकार पर वार, कहा ठाकुरवाद को बढ़ावा दे रहे -

वही डॉ उदित राज जो की कांग्रेस के एक नेता है, उन्होंने साफ शब्दों में ​बोला यदि विकास ठाकुर होता।  तो क्या सरकार इसी तरह कार्यवाही करती। इसके अलावा सोशल मीडिया पर कमेन्ट्स की बाढ सी चल रही है। जिसमे लोग इसे राजनितिक स्तर पर ठाकुर तथा ब्राह्मण की लड़ाई बता रहे है। कई ब्राह्मणो ने योगी सरकार पर आरोप लगाया की सरकार ब्राह्मणो की उपेक्षा कर रही है।

वही विपक्ष ने योगी आदित्यनाथ पर काफी गंभीर आरोप लगाए। और कहा की योगी सरकार जबसे शासन में आयी है।  तबसे उन्होंने अपने प्रतिद्वंदियों के विरुद्ध गैरकानूनी रूप से कारवाही करी है। उनका कहना है की पूरे उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज के विरुद्ध सोच समझकर 400 से ज्यादा एनकाउंटर किये गए है। 

​विकास दुबे एनकाउंटर पर पूर्व वरिष्ठ अधिकारियो की राय -

पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आज़ाद का कहना है, विकास दुबे का एनकाउंटर गलत है। उसका जिन्दा रहना जरूरी था। कार्यवाही के दौरान वह कई राज खोल सकता था। जिससे प्रशासन व्यवस्था सही होती। उन्होंने एनकाउंटर पर संदेह जताते हुए कहा यह पुलिस वह राजनेताओ की मिलीभगत है। इसके साथ ही निष्पक्ष सीबीआई जांच की मांग की। 

​अपराधियों के परिजनों के प्रति पुलिस के व्यव्हार पर उठे सवाल -

विकास दुबे एनकाउंटर पर उठे सवाल जो यूपी चुनावो में बन सकता है योगी सरकार के लिए परेशानी का कारण

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पुलिस इस वारदात में संदिग्ध अपराधियों के घर वालो के साथ उचित व्यव्हार नहीं कर रही। इसमें सबसे बड़ा सवाल पुलिस का अमर दुबे की नवविवाहिता ख़ुशी दुबे के प्रति व्यवहार। लोगो के मन में इसके प्रति काफी आक्रोश है। इस मामले की पूरी जानकारी के लिए हमारा यह आर्टिकल पढ़े  ;  ख़ुशी दुबे अभी भी हिरासत में क्यों 

लोगो का कहना है की वह विकास दुबे का साथ नहीं दे रहे बल्कि उनका ​यह मानना है। जिस तरह पुलिस बदले की निति अपना रही है, यह पुलिस प्रशासन को शोभा नहीं देता है। इससे कानून व्यवस्था का आपराधीकरण होगा तथा सूबे में अव्यवस्था फैलेगी। यह मत कई वरिष्ठ अधिकारीओ का भी है। यह पुलिस का आपराधिकरण सूबे में जंगलराज को बढ़ावा देगा। और यदि इसी तरह न्याय देना है तो उत्तर प्रदेश के सारे न्यायलय बंद कर देने चाहिए।

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